रायपुर। छत्तीसगढ़ के ग्रामोद्योग विभाग के उत्पादों को अब एक नई पहचान मिलने जा रही है। विभाग के सचिव और आईएएस (IAS) राजेश सिंह राणा ने बुधवार, 20 मई को मंत्रालय महानदी भवन में एक हाई-लेवल समीक्षा बैठक ली। इस बैठक में खादी बोर्ड, हस्तशिल्प, माटीकला और हाथकरघा संघ के तमाम बड़े अधिकारियों के साथ-साथ मार्केटिंग कंसल्टेंट्स और डिजाइनर्स भी मौजूद रहे। बैठक में बस्तर में रोजगार बढ़ाने, उत्पादों की ब्रांडिंग और नए इनोवेशंस को लेकर कई कड़े निर्देश जारी किए गए।
बस्तर में रोजगार और नेशनल फाइबर मिशन पर फोकस
सचिव राजेश सिंह राणा ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बस्तर संभाग में ईरी टसर (रेशम) उत्पादन की संभावनाओं को लेकर तुरंत एक स्टडी रिपोर्ट और प्रस्ताव तैयार करें। वहां हस्तशिल्प और ग्रामोद्योग के जरिए स्थानीय लोगों को रोजगार से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जाए।
इसके साथ ही उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार जून महीने में ‘नेशनल फाइबर मिशन’ शुरू करने जा रही है। छत्तीसगढ़ की जलवायु ‘कपोक’ (सेमल/कॉटन ट्री) के पौधरोपण के लिए बिल्कुल अनुकूल है। इसलिए रेशम प्रभाग को राज्य में इसके लिए नए इलाके चिन्हित करने के निर्देश दिए गए हैं।
अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर बिकेंगे स्वदेशी उत्पाद, गाड़ियों का खर्च होगा कम
बैठक में सचिव ने साफ कहा कि महिला स्व-सहायता समूहों (SHGs) द्वारा बनाए जा रहे बेहतरीन सामानों की बिक्री के लिए पुख्ता इंतजाम किए जाएं। अब छत्तीसगढ़ के ये स्थानीय उत्पाद अमेज़न (Amazon), मीशो (Meesho) और फ्लिपकार्ट (Flipkart) जैसे बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी लाइव किए जाएंगे। इसके लिए कड़े निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि हर प्रोडक्ट की ब्रांडिंग और पैकेजिंग वर्ल्ड-क्लास होनी चाहिए।
वित्त विभाग और प्रधानमंत्री की मंशा का हवाला देते हुए सचिव ने विभाग में गाड़ियों और वाहनों पर होने वाले फिजूलखर्ची व व्यय को तुरंत कम करने की हिदायत भी दी।
मोबाइल वैन से होगी बिक्री, गुजरात की तर्ज पर ‘हर घर स्वदेशी’ अभियान
लोकल रिपोर्टर के मुताबिक, छत्तीसगढ़ के पारंपरिक सामानों को बढ़ावा देने के लिए रायपुर और दुर्ग जिले में एक अनोखा प्रयोग किया जाएगा। यहां हफ्ते में कम से कम दो दिन मोबाइल वैन के जरिए खादी, माटीकला और हाथकरघा के सामानों की प्रदर्शनी और बिक्री की जाएगी। इसके लिए दो गाड़ियां किराए पर ली जाएंगी, जो शहर के प्रमुख चौराहों और बाजारों में जाकर सामान बेचेंगी।
गुजरात में चल रहे ‘हर घर स्वदेशी, घर घर स्वदेशी’ अभियान की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी खादी ग्रामोद्योग बोर्ड को काम करने के लिए कहा गया है। इसके अलावा बोर्ड को अपनी मौजूदा सेवाओं में 5 नई नागरिक सेवाएं जोड़ने का टारगेट दिया गया है।