आरक्षण नियमों का उल्लंघन पड़ा भारी: बिलासपुर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, शिक्षकों की भर्ती लिस्ट रद्द, 90 दिनों में दोबारा बनेगी मेरिट

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षक भर्ती को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ कहा है कि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षित पदों पर तय सीमा से ज्यादा दिव्यांग उम्मीदवारों को सिर्फ उनकी योग्यता (मेरिट) के आधार पर नौकरी देना कानूनी तौर पर बिल्कुल गलत है। जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की सिंगल बेंच ने इस मामले में राज्य सरकार द्वारा जारी की गई पुरानी मेरिट लिस्ट को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने लोक शिक्षण संचालनालय को अगले 90 दिनों के भीतर नियमों के मुताबिक दोबारा नई मेरिट लिस्ट तैयार करने का कड़ा आदेश दिया है।

क्या है पूरा मामला?

लोकल रिपोर्टर के मुताबिक, यह पूरा विवाद साल 2019 में निकली शिक्षक भर्ती से जुड़ा है। उमेश कुमार श्रीवास और अन्य उम्मीदवारों ने हाईकोर्ट में एक याचिका (Writ Petition) दायर की थी। याचिका में बताया गया था कि लोक शिक्षण संचालनालय ने 9 मार्च 2019 को व्याख्याता (Lecturer), शिक्षक और सहायक शिक्षकों के खाली पदों को भरने के लिए विज्ञापन निकाला था। इस परीक्षा में ओबीसी वर्ग के कई सामान्य उम्मीदवारों ने भी अच्छे नंबर लाकर मेरिट सूची में अपनी जगह बनाई थी।

तय कोटे से ज्यादा दिव्यांगों को दे दी नौकरी, सामान्य ओबीसी का मरा हक

गड़बड़ी तब सामने आई जब चयन समिति ने प्रोविजनल मेरिट लिस्ट (चयन सूची) जारी की। नियमों के मुताबिक दिव्यांगों के लिए 7 प्रतिशत का कोटा तय था। लेकिन विभाग ने इस तय सीमा को दरकिनार करते हुए कहीं ज्यादा दिव्यांग उम्मीदवारों को ओबीसी वर्ग की सीटों पर चुन लिया।

इससे हुआ यह कि जो सामान्य ओबीसी उम्मीदवार मेरिट में ऊपर थे, वे नौकरी पाने से वंचित रह गए और उनका हक पूरी तरह प्रभावित हुआ। इसी मनमानी के खिलाफ पीड़ित उम्मीदवारों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी: यह प्रक्रिया पूरी तरह गलत है

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने चयन समिति की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने दोटूक शब्दों में कहा कि भर्ती बोर्ड द्वारा अपनाई गई यह प्रक्रिया पूरी तरह गलत और दोषपूर्ण है। इस तरह के तरीके से सभी श्रेणियों के उम्मीदवारों को बराबरी और समान अवसर (Equal Opportunity) नहीं मिल पाता है।

अदालत ने अब सरकार को अपनी गलती सुधारने के लिए 3 महीने का वक्त दिया है। इस फैसले के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है और अब पूरी भर्ती सूची को नए सिरे से खंगाला जाएगा।

Related News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *