दिल्ली की सबसे खतरनाक चुनौतियों में शामिल वाहन जनित प्रदूषण को लेकर प्रशासन अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है। दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ऑडिट रिपोर्ट का हवाला देते हुए लोक लेखा समिति (PAC) की सिफारिशों पर तत्काल कार्रवाई के आदेश दिए हैं। इस संबंध में दिल्ली सरकार के परिवहन मंत्री और विभाग के सचिव को कड़ा पत्र भेजकर समयबद्ध जवाब मांगा गया है। सभी संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे 31 दिसंबर 2026 तक सिफारिशों को लागू करने की स्थिति साफ करें और 31 जनवरी 2027 तक पूरी एक्शन रिपोर्ट विधानसभा सचिवालय को सौंपें।
सार्वजनिक परिवहन की विफलता और निगरानी तंत्र की खामियों पर उठाए गंभीर सवाल
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने राजधानी की बिगड़ती वायु गुणवत्ता के लिए सार्वजनिक परिवहन प्रणाली की जर्जर स्थिति और निगरानी तंत्र की विफलता को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि बसों की कमी, रूट कवरेज की सीमाएं और कमजोर लास्ट माइल कनेक्टिविटी के कारण लोग निजी वाहनों पर निर्भर हो रहे हैं, जिससे सड़कों पर ट्रैफिक और प्रदूषण दोनों बढ़ रहे हैं। ऑडिट रिपोर्ट में प्रदूषण जांच केंद्रों की कम संख्या, पीयूसी प्रक्रिया में धांधली और पुराने वाहनों की स्क्रैपिंग में हो रही देरी जैसे संरचनात्मक दोषों को भी उजागर किया गया है। विजेंद्र गुप्ता ने जोर देकर कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी नीतियां तब तक प्रभावी नहीं होंगी जब तक विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी दूर नहीं की जाती। सरकार को अब छोटे उपायों के बजाय साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर तय समयसीमा में ठोस नतीजे देने होंगे।