भुरकोनी (पिथौरा)। भीषण गर्मी के बीच ग्राम भुरकोनी में पेयजल संकट विकराल रूप ले चुका है। करीब 1100 की आबादी वाला यह गांव इन दिनों पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहा है। गांव के अधिकांश हैंडपंप सूख चुके हैं और नलजल व्यवस्था भी पूरी तरह ठप हो गई है।
समस्या के समाधान के लिए गांव में बोरवेल खनन कार्य शुरू किया गया था, जिसमें 400 फीट तक बोरिंग किया जाना था। लेकिन लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने मात्र 150 फीट पर ही बोरिंग कर कार्य अधूरा छोड़ दिया। इससे बोरवेल से पर्याप्त पानी नहीं निकल पा रहा है और जल संकट जस का तस बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्धारित गहराई तक बोरिंग की जाती तो स्थिति कुछ हद तक सुधर सकती थी।
ग्रामीणों ने बताया कि इस समस्या को लेकर पूर्व में महासमुंद कलेक्टर को भी अवगत कराया गया था, लेकिन विभाग द्वारा केवल औपचारिकता निभाते हुए गोलमोल जवाब दिया गया और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। न तो अधूरे बोरवेल को पूरा किया गया और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था बनाई गई। इससे लोगों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।
कई परिवारों को दूर-दराज के स्रोतों से पानी लाना पड़ रहा है, जिससे समय और श्रम दोनों की भारी परेशानी हो रही है। छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति और भी कष्टदायक बन गई है। पानी की कमी के कारण स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ने लगी हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान स्थिति में एक अधूरा बोरवेल किसी काम का नहीं है। उन्होंने मांग की है कि अधूरे बोर को 400 फीट तक पूरा किया जाए और गांव में कम से कम 3 नए बोरवेल खनन कराए जाएं, तभी इस समस्या से कुछ राहत मिल सकती है। साथ ही लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठ रही है।
लगातार अनदेखी से नाराज ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही समाधान नहीं किया गया तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। फिलहाल स्थिति जस की तस बनी हुई है और बढ़ती गर्मी के साथ संकट और गहराने की आशंका है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कब तक ध्यान देता है और भुरकोनी के लोगों को राहत कब मिलती है।
इस संबंध में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन अभियंता देव प्रकाश वर्मा से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया, जिससे उनका पक्ष नहीं मिल सका।