9 साल पुराना साथ टूटा, डीएमके से अलग हुई एमडीएमके; तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरण


चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। मरुमलारची द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एमडीएमके) ने द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के साथ अपना करीब नौ साल पुराना गठबंधन खत्म करने का ऐलान कर दिया है। यह फैसला पार्टी की जनरल काउंसिल की बैठक में लिया गया।

हालांकि, एमडीएमके ने अभी आधिकारिक तौर पर टीवीके के नेतृत्व वाले मोर्चे में शामिल होने की घोषणा नहीं की है। लेकिन हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों को देखते हुए दोनों दलों के बीच बढ़ती नजदीकियों की चर्चा तेज हो गई है।

मुख्यमंत्री विजय सरकार का किया स्वागत

बैठक में पारित प्रस्तावों में एमडीएमके ने मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली सरकार का स्वागत किया। साथ ही सरकार से चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा करने की अपील की। पार्टी ने भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन और मेकेदातू बांध परियोजना जैसे मुद्दों पर तमिलनाडु के हितों की रक्षा करने की भी मांग उठाई।

डीएमके पर लगाए गंभीर आरोप

गठबंधन तोड़ने के पीछे एमडीएमके ने डीएमके पर कई आरोप लगाए। पार्टी का कहना है कि डीएमके के भीतर लगातार एमडीएमके को कमजोर करने की कोशिश की जा रही थी। एमडीएमके ने यह भी दावा किया कि कुछ राजनीतिक गतिविधियां ऐसी थीं, जिनके चलते गठबंधन में बने रहना संभव नहीं था।

हालांकि, डीएमके ने इन आरोपों को खारिज कर दिया। पार्टी नेताओं का कहना है कि डीएमके ने ही एमडीएमके को विधानसभा और संसद में प्रतिनिधित्व दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी।

दो विधायकों ने दिखाई अलग राह

एमडीएमके के इस फैसले के बीच पार्टी के दो विधायकों ने जनरल काउंसिल की बैठक का बहिष्कार कर दिया। दोनों विधायक डीएमके के चुनाव चिह्न पर विधानसभा पहुंचे थे। उनके रुख से संकेत मिले हैं कि वे डीएमके के साथ ही बने रहना चाहते हैं।

टीवीके से बढ़ी नजदीकियां

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एमडीएमके और टीवीके के बीच रिश्ते पिछले कुछ समय से मजबूत हुए हैं। विश्वास मत के दौरान एमडीएमके ने मतदान से दूरी बनाई थी। इसके बाद पार्टी प्रमुख वाइको और सांसद दुरई वाइको की मुख्यमंत्री विजय के साथ कई बैठकें भी हुई थीं।

डीएमके में भी उठ रही अकेले चुनाव लड़ने की मांग

इस घटनाक्रम के बीच डीएमके के अंदर भी भविष्य में बिना गठबंधन चुनाव लड़ने की मांग तेज हो रही है। पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से यह राय रखी है कि डीएमके अपने दम पर चुनाव लड़ने की क्षमता रखती है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एमडीएमके के इस फैसले से तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं। आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन की तस्वीर में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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