मध्य प्रदेश की वीवीआईपी दतिया विधानसभा सीट के आगामी उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने एक बड़ा फैसला लिया है। पार्टी ने पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट न देकर पूर्व संभागीय संगठन मंत्री आशुतोष तिवारी को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। आशुतोष तिवारी मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं और दतिया से ही ताल्लुक रखते हैं। पार्टी के इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।

टिकट कटने के पीछे की वजह क्या है?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बीजेपी का यह फैसला काफी सोच-समझकर लिया गया है। साल 2023 के विधानसभा चुनाव में मिली हार को पार्टी भूलना चाहती है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी की एक केंद्रीय सर्वे टीम लंबे समय से दतिया में रहकर वहां की जमीनी स्थिति और जनता के मिजाज को समझ रही थी।
माना जा रहा है कि इस गोपनीय सर्वे में डॉ. नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर यानी एंटी-इंकंबेंसी का असर दिखाई दिया था। इसी सर्वे रिपोर्ट के आधार पर पार्टी आलाकमान ने चेहरा बदलने का कठिन निर्णय लिया। हालांकि, टिकट की घोषणा से ठीक पहले तक डॉ. मिश्रा दतिया में लगातार सक्रिय थे और जनसंपर्क में जुटे हुए थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें किनारे कर दिया।
नए उम्मीदवार आशुतोष तिवारी की भूमिका
आशुतोष तिवारी को बीजेपी का बेहद पुराना और निष्ठावान कार्यकर्ता माना जाता है। अब उनके सामने दतिया की खोई हुई सीट को वापस जीतने की बड़ी चुनौती है। पार्टी को उम्मीद है कि नया चेहरा जनता के बीच सकारात्मक संदेश लेकर जाएगा। वहीं, डॉ. मिश्रा के समर्थकों के लिए पार्टी का यह फैसला किसी बड़े झटके से कम नहीं है। अब देखना यह है कि आगामी चुनाव में दतिया की जनता इस बदलाव को किस तरह स्वीकार करती है।