नई दिल्ली / रायपुर: छत्तीसगढ़ के सबसे संवेदनशील और नक्सल प्रभावित इलाके ‘बस्तर’ में माओवादियों के खिलाफ सुरक्षा बलों का नेतृत्व करने वाले जांबाज आईपीएस अधिकारी पी. सुंदरराज ने देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी एनआईए (NIA – National Investigation Agency) में इंस्पेक्टर जनरल (IG) के रूप में अपनी नई जिम्मेदारी संभाल ली है।
पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक और देश सेवा से ओतप्रोत संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा—
“राह नई है, लेकिन सेवा का संकल्प वही है। आप सभी का स्नेह और विश्वास ही मेरी सबसे बड़ी शक्ति और प्रेरणा है।”
भावुक संदेश में जताया सबका आभार
आईपीएस पी. सुंदरराज ने अपनी नई यात्रा की शुरुआत करते हुए अपने अब तक के पुलिस सेवाकाल के अनुभवों को याद किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सेवा के दौरान उन्हें जो सहयोग, शुभकामनाएं, सीनियर अधिकारियों का मार्गदर्शन, साथियों की मित्रता और जमीनी अनुभव मिले हैं, वे सभी एनआईए के इस नए और बड़े दायित्व को निभाने में उनकी प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे। उन्होंने सभी शुभचिंतकों, सहयोगियों और आम नागरिकों का आभार जताते हुए कहा कि वे इस नई जिम्मेदारी को पूरी विनम्रता, कृतज्ञता और राष्ट्र सेवा के नए संकल्प के साथ निभाएंगे।
बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ रहे सबसे मजबूत चेहरा
वर्ष 2003 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारी पी. सुंदरराज का नाम छत्तीसगढ़ के इतिहास में नक्सल विरोधी अभियानों के सबसे प्रभावशाली रणनीतिकारों में गिना जाता है। वे लंबे समय तक बस्तर रेंज के आईजी रहे। उनके कार्यकाल की कुछ बड़ी उपलब्धियां इस प्रकार हैं:
रणनीतिक कैंप और अंदरूनी इलाकों में पहुंच: उनके नेतृत्व में सुरक्षा बलों ने बस्तर के उन दुर्गम और घने जंगलों में नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए, जिन्हें कभी नक्सलियों का गढ़ माना जाता था। ‘अबूझमाड़’ जैसे बीहड़ इलाकों में सुरक्षा बलों की पहुंच मजबूत करने में उनकी भूमिका अहम रही।
चौतरफा विकास पर जोर: सुंदरराज पी की रणनीति सिर्फ बंदूक की लड़ाई तक सीमित नहीं थी। उन्होंने खुफिया तंत्र (Intelligence Network) को मजबूत करने के साथ-साथ बस्तर के युवाओं को मुख्यधारा और सुरक्षा अभियानों से जोड़ने का काम किया। नक्सलियों के प्रभाव को कम करने के लिए उन्होंने अंदरूनी इलाकों में सड़कों के जाल और विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया।
नक्सलियों का आत्मसमर्पण: उनके कड़े रुख और पुनर्वास नीतियों के कारण उनके कार्यकाल में रिकॉर्ड संख्या में माओवादियों ने हथियार डालकर आत्मसमर्पण किया, जिससे नक्सली संगठन को भारी नुकसान पहुंचा।
बस्तर में शांति और सुरक्षा की नई इबारत लिखने के बाद, अब देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए वे राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) में अपनी सेवाएं देंगे।