नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर बुधवार को सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग के फैसले को बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया में मतदाताओं के पास 11 दस्तावेज़ों का विकल्प है, जबकि पहले के संक्षिप्त पुनरीक्षण में केवल 7 दस्तावेज़ मांगे जाते थे, जो प्रक्रिया को और अधिक समावेशी बनाता है।
मुख्य बिंदु:
- दस्तावेज़ों की संख्या बढ़ी: पहले 7 थे, अब 11 विकल्प – आधार को छोड़कर पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड आदि शामिल।
- पीठ का तर्क: “36 लाख पासपोर्ट धारकों का कवरेज पर्याप्त, सरकार ने विभिन्न विभागों से फीडबैक लेकर सूची तैयार की।”
- याचिकाकर्ताओं की आपत्ति: वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी ने कहा – “दस्तावेज़ों की उपलब्धता कम, बिहार में केवल 1-2% के पास पासपोर्ट।”
- SC की प्रतिक्रिया: “चुनाव आयोग का दावा है कि 6.5 करोड़ मतदाताओं को कोई नया दस्तावेज़ जमा करने की ज़रूरत नहीं, क्योंकि वे या उनके माता-पिता पहले से सूची में हैं।”
पृष्ठभूमि:
12 अगस्त को SC ने स्पष्ट किया था कि मतदाता सूची में नागरिकता का सत्यापन चुनाव आयोग का अधिकार क्षेत्र है। आयोग ने बिहार में एसआईआर का आदेश 24 जून को जारी किया था, जिसमें आधार और वोटर आईडी को नागरिकता प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया गया।
कोर्ट का नज़रिया:
- “यह विवाद विश्वास की कमी का है,” – पीठ ने कहा, आयोग के दावों पर संदेह को अनुचित बताया।
- “11 दस्तावेज़ों का विकल्प मतदाताओं के लिए बेहतर,” – न्यायमूर्ति सूर्यकांत और जॉयमाल्या बागची की बेंच ने याचिकाएं खारिज करते हुए कहा।
आगे क्या?
चुनाव आयोग अब बिहार में मतदाता सूची की विशेष जांच जारी रखेगा। विपक्षी दलों का आरोप है कि यह प्रक्रिया कुछ समुदायों को लक्षित करने का प्रयास है, लेकिन SC के इस फैसले के बाद अब राजनीतिक बहस और तेज़ होने की उम्मीद है।
#BiharVoterList #SupremeCourt #ElectionCommission #SIR #VoterVerification #HindiNews