देश में सड़क हादसों का डरावना आंकड़ा: साल भर में 1.77 लाख से ज्यादा लोगों ने गंवाई जान, दोपहिया वाहन चालक सबसे ज्यादा शिकार

भारत की सड़कों पर सफर करना लगातार खतरनाक होता जा रहा है। केंद्र सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने देश में होने वाले सड़क हादसों को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली और डरावनी रिपोर्ट जारी की है। इस सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2024 के दौरान देश भर की सड़कों पर हुए हादसों में 1 लाख 77 हजार से अधिक लोगों की मौत हो गई। आंकड़ों से पता चलता है कि देश में हर घंटे औसतन 56 सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं और इनमें हर घंटे करीब 20 लोग अपनी जान गंवा रहे हैं।

पिछले साल के मुकाबले हादसों में हुई बढ़ोतरी

सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस थानों में कुल 4,87,707 सड़क हादसे दर्ज किए गए। यह संख्या इससे पिछले साल यानी 2023 के मुकाबले करीब 1.48 प्रतिशत ज्यादा है। इन भयानक हादसों में जहां 1.77 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई, वहीं 4 लाख 71 हजार से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि सड़कों को सुरक्षित बनाने के तमाम दावों के बावजूद जमीन पर स्थिति गंभीर बनी हुई है।

तमिलनाडु हादसों में आगे, यूपी में सबसे ज्यादा मौतें

इस रिपोर्ट में राज्यों के हिसाब से भी आंकड़े सामने आए हैं। देश में सबसे ज्यादा सड़क हादसे तमिलनाडु में दर्ज किए गए, जहां साल भर में 67,526 दुर्घटनाएं हुईं। हालांकि, हादसों में होने वाली मौतों के मामले में उत्तर प्रदेश सबसे ऊपर रहा। उत्तर प्रदेश में सड़क हादसों की वजह से सबसे ज्यादा 24,118 लोगों ने अपनी जान गंवाई। रिपोर्ट के अनुसार, देश के नेशनल हाईवे यानी राष्ट्रीय राजमार्गों पर 31 प्रतिशत हादसे हुए, जबकि सबसे ज्यादा 41.3 प्रतिशत दुर्घटनाएं स्थानीय और अन्य जिला सड़कों पर दर्ज की गईं।

सड़कों पर बाइक सवारों को सबसे ज्यादा खतरा

मंत्रालय की इस रिपोर्ट से यह भी साफ हो गया है कि सड़कों पर चलने वाले दोपहिया वाहन चालकों यानी बाइक और स्कूटी सवारों की जिंदगी सबसे ज्यादा जोखिम में है। कुल सड़क हादसों में जान गंवाने वालों में सबसे बड़ा हिस्सा (46.2 प्रतिशत) दोपहिया वाहन चलाने वालों का ही था। इसके बाद सड़कों पर पैदल चलने वाले लोग सबसे ज्यादा हादसों का शिकार हुए, जिनकी मौतों में हिस्सेदारी 20.6 प्रतिशत रही। वहीं कार, टैक्सी और वैन जैसे हल्के वाहनों में सफर करने वाले 12.4 प्रतिशत लोगों की मौत इन हादसों में हुई है।

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