रायपुर। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के छत्तीसगढ़ दौरे के बाद प्रदेश कांग्रेस की सियासत में बदलाव को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सबसे ज्यादा चर्चा उस मुलाकात की है, जिसमें राहुल गांधी ने विधायक उमेश पटेल से अकेले में लंबी बातचीत की। यह बातचीत उस समय हुई, जब प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज भी आसपास मौजूद थे।
राहुल और उमेश पटेल की इस मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी में बदलाव हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक उमेश पटेल को इस भूमिका के लिए संभावित चेहरे के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि कांग्रेस की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
पार्टी के अंदर यह चर्चा भी है कि मौजूदा नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत के नेतृत्व में विधानसभा के भीतर विपक्ष की आक्रामकता अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाई है। ऐसे में कांग्रेस आने वाले चुनावों को देखते हुए सदन में ज्यादा सक्रिय और प्रभावी नेतृत्व की तलाश कर सकती है।
राहुल गांधी जब एयरपोर्ट के लिए रवाना हुए तो उमेश पटेल उनके साथ नजर आए। रास्ते में राहुल एक चाय की दुकान पर रुके और कार्यकर्ताओं के साथ संवाद किया। इन घटनाक्रमों ने बदलाव की अटकलों को और हवा दे दी है। उमेश पटेल को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का करीबी माना जाता है।
संगठन मजबूत करने पर राहुल का फोकस
राहुल गांधी रविवार को एक दिवसीय दौरे पर छत्तीसगढ़ पहुंचे थे। अभनपुर के चांदी मोड़ स्थित आशुतोष-अलका अग्रवाल मंगल भवन में आयोजित कांग्रेस के 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में उन्होंने हिस्सा लिया।
इस दौरान राहुल गांधी ने प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं, पूर्व मंत्रियों, जिला और शहर कांग्रेस अध्यक्षों सहित संगठन के पदाधिकारियों से अलग-अलग बैठकें कीं। बैठकों में प्रदेश की राजनीतिक स्थिति, संगठन की मजबूती और आगामी चुनावों की रणनीति पर चर्चा हुई।
कांग्रेस नेताओं के मुताबिक राहुल गांधी ने जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत करने और जनता से सीधा संवाद बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने नेताओं को बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने और स्थानीय मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाने का संदेश दिया।
जिला अध्यक्षों को मिला जमीनी राजनीति का प्रशिक्षण
कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान के तहत आयोजित इस प्रशिक्षण शिविर में प्रदेशभर के नए जिला और शहर कांग्रेस अध्यक्ष शामिल हुए हैं। प्रशिक्षण में सिर्फ राजनीतिक रणनीति ही नहीं, बल्कि सामाजिक मुद्दों को समझने और जनता के बीच काम करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
प्रतिभागियों को गांवों में जाकर ग्रामीणों के साथ समय बिताने, मनरेगा जैसी योजनाओं की स्थिति समझने, नशे जैसी सामाजिक समस्याओं का अध्ययन करने और स्थानीय मुद्दों की जानकारी जुटाने की जिम्मेदारी दी गई है।
इसके अलावा योग, व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व क्षमता, संगठन प्रबंधन, मीडिया प्रबंधन, जनसंपर्क और बूथ स्तर पर चुनावी तैयारी जैसे विषयों पर भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
चुनाव की तैयारी में जुटी कांग्रेस
राहुल गांधी ने अपने संवाद के दौरान कांग्रेस नेताओं से कहा कि संगठन की मजबूती ही चुनावी सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है। उन्होंने भाजपा सरकार के खिलाफ प्रभावी मुद्दे तैयार करने और जनता के बीच लगातार सक्रिय रहने पर जोर दिया।
राहुल के दौरे के बाद अब छत्तीसगढ़ कांग्रेस में संभावित बदलावों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। आने वाले दिनों में संगठन और विधानसभा नेतृत्व को लेकर पार्टी क्या फैसला करती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।