13 से 19 साल की उम्र सिर्फ एक नंबर नहीं है बल्कि यह जिंदगी का सबसे नया और महत्वपूर्ण पड़ाव होता है। इस उम्र में बच्चे बड़े हो रहे होते हैं। वैसे तो लड़का और लड़की दोनों के ही शरीर में इस दौरान कई तरह के बदलाव होते हैं, लेकिन लड़कियों का शरीर टीनेज में सबसे तेजी से विकसित होता है। इस शारीरिक विकास का सीधा असर उनके रहन-सहन और लाइफस्टाइल पर पड़ता है। माता-पिता के लिए बेटी का यह बदलता हुआ लाइफस्टाइल अक्सर चिंता बढ़ा देता है। इस उम्र में कई ऐसे जरूरी और मुश्किल विषय होते हैं जिन पर बेटी से खुलकर बात करना बेहद आवश्यक है, लेकिन ज्यादातर माता-पिता को समझ नहीं आता कि बातचीत की शुरुआत कैसे करें।
बदलती आदतों के बीच माता-पिता की बड़ी चुनौती
टीनेज में आते ही बेटी को क्या खाना है, क्या पहनना है और कैसे रहना है जैसी कई आदतें अचानक बदलने लगती हैं। अब माता-पिता के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि वे अपनी बेटी से पीरियड्स, सेक्स एजुकेशन, क्रश और शारीरिक बदलावों जैसे संवेदनशील विषयों पर कैसे चर्चा करें। अगर आप भी इस दौर से गुजर रहे हैं, तो नीचे बताए गए कुछ आसान तरीकों को अपनाकर अपनी बेटी के सबसे अच्छे दोस्त बन सकते हैं।
शारीरिक बदलावों पर खुलकर करें चर्चा
वैसे तो आजकल के आधुनिक स्कूलों में बच्चों को इन विषयों की बुनियादी जानकारी दी जाने लगी है। इसके बावजूद माता-पिता होने के नाते यह आपकी मुख्य जिम्मेदारी बनती है कि आप अपनी बेटी को प्यूबर्टी यानी युवावस्था के बारे में ठीक से और बिना किसी झिझक के बताएं। उन्हें यह समझाना बहुत जरूरी है कि वह इस समय जिस भी तरह के शारीरिक बदलावों से गुजर रही है, दुनिया की सभी लड़कियां उस दौर से गुजरती हैं। उन्हें भरोसा दिलाएं कि ये सभी बातें एकदम सामान्य हैं और इसमें डरने या शर्माने की कोई जरूरत नहीं है।
झूठ या मनगढ़ंत कहानियां सुनाने से बचें
अगर आपकी बेटी अपने शरीर के विकास, प्यूबिक हेयर या प्रजनन से जुड़ा कोई भी गंभीर सवाल आपसे पूछती है, तो उसे टालने के लिए कोई झूठी या मनगढ़ंत कहानी मत सुनाएं। अक्सर माता-पिता ऐसे मुश्किल सवालों से बचने के लिए कोई काल्पनिक कहानी गढ़ देते हैं। इससे नुकसान यह होता है कि बच्ची को अपने सबसे भरोसेमंद सोर्स यानी अपने माता-पिता से सही जानकारी नहीं मिल पाती है। इसके बाद वह इस विषय पर दोबारा कभी भी आपसे बात करने में सहज महसूस नहीं कर पाएगी और बाहर से गलत जानकारियां जुटाने लगेगी।
साफ-सफाई और पर्सनल हाइजीन की दें जानकारी
युवावस्था की शुरुआत होते ही शरीर के अंदर कई तरह के हार्मोन बनने लगते हैं। इन हार्मोन्स के निकलने से सेक्सुअल हेल्थ पर सीधा असर पड़ने लगता है। ऐसे में बेटी को केवल पीरियड्स यानी मासिक धर्म की जानकारी देना ही काफी नहीं है, बल्कि उसे अपने प्राइवेट पार्ट्स की साफ-सफाई यानी वजाइना हाइजीन के बारे में भी विस्तार से बताना बेहद जरूरी हो जाता है। उसे समझाएं कि इस समय लापरवाही बरतने से कई तरह की बीमारियां या इंफेक्शन हो सकते हैं।
विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण को सहजता से समझाएं
अपनी बेटी को बहुत ही प्यार से समझाएं कि शरीर में हो रहे हार्मोन के बदलावों के कारण इस उम्र में लड़कों की तरफ आकर्षण बढ़ना बिल्कुल स्वाभाविक है। ऐसी स्थिति में उसे खुद को मानसिक रूप से कैसे संभालना है, अपनी भावनाओं पर कैसे काबू पाना है और एक सुरक्षित व अच्छे रिश्ते की पहचान कैसे करनी है, इसके बारे में गाइड करें। उसे बताएं कि इस उम्र में किसी पर क्रश होना कोई गंभीर रिलेशनशिप नहीं होता है, बल्कि यह सिर्फ अंदरूनी भावनाओं को समझने और रिश्तों को जानने की एक शुरुआती सीख है।