जिले में प्रशासन और सिस्टम के खिलाफ अनोखा आक्रोश पहली बारिश ने ही खोल दी विकास के दावों की पोल
सूरजपुर / भैयाथान
देश में भले ही अमृत काल और चहुंमुखी विकास के बड़े-बड़े ढिंढोरे पीटे जा रहे हों, लेकिन सूरजपुर जिले के भैयाथान क्षेत्र से जमीनी हकीकत की जो तस्वीर सामने आई है, वह बेहद शर्मनाक है। तमाम शिकायतों और मिन्नतों के बाद भी जब बहरे सिस्टम के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी, तो क्षेत्र के युवाओं और स्थानीय निवासियों ने गांधीवादी लेकिन बेहद तीखा रास्ता अख्तियार किया है। पुल की दयनीय स्थिति और गायब अप्रोच रोड से नाराज युवाओं ने अब खुद ही मोर्चा संभाल लिया है और चंदे के पैसे से अप्रोच रोड बनाने की अनोखी मुहिम शुरू कर दी है।
पहली ही बारिश में बह गए दावे, जनता झेल रही नरक
मानसून की शुरुआत होते ही क्षेत्र की बदहाल सड़क व्यवस्था की कलई पूरी तरह खुल चुकी है। नेताओं ने बरसात से पहले व्यवस्था दुरुस्त करने के जितने भी खोखले दावे किए थे, पहली ही बारिश ने उनकी पोल पट्टी खोलकर रख दी। आलम यह है कि आम जनता को रोजाना घुटने भर कीचड़ और जलभराव के बीच जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को मजबूर होना पड़ रहा है, बता दें कि लोगों को ग्राम पंचायत गंगौटी, डबरीपारा, खुटरापारा, बासापरा,भवराही, सोनपुर, करौन्दा मुंडा, टेगनी,बिलारो, बड़सरा, बस्कर और पन्डोपारा से यह पूल जोड़ती है।

युवाओं का दोटूक जब तक बनेगा नहीं, तब तक रुकेंगे नहीं
आंदोलन की कमान संभाल रहे जनपद पंचायत भैयाथान के क्षेत्र क्र. 07 के जनपद सदस्य व सहकारिता व उद्योग विकास विभाग के सभापति राजु कुमार गुप्ता व क्षेत्रीय युवाओं का कहना है, हम अब और आश्वासन नहीं सुनेंगे। हमारी कोशिशें लगातार जारी रहेंगी। जब तक अप्रोच रोड का निर्माण पूरा नहीं हो जाता, तब तक चंदा जुटाने और खुद काम करने की हमारी यह मुहिम बंद नहीं होगी। यह हमारा अनोखा विरोध भी है और सिस्टम को आईना दिखाना भी।
निरीक्षण का ड्रामा बंद करे सरकार, सफेद हाथी बना पुल
स्थानीय ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि कुछ समय पहले सत्ताधारी दल के नेताओं ने बड़े तामझाम के साथ इस पुल का निरीक्षण किया था। तब जनता की आंखों में यह आस जागी थी कि शायद इस बार इस पुल और सड़क का कायाकल्प हो जाएगा। लेकिन नेताओं के जाते ही फाइलें फिर दब गईं और आज यह पुल सिर्फ एक सफेद हाथी बनकर खड़ा है, जिसका जनता को कोई लाभ नहीं मिल रहा।
सुलगते सवाल,, आखिर कब जागेगा सोया हुआ प्रशासन
अंतर,, विकास के कागजी दावों और जमीनी हकीकत में इतना बड़ा अंतर क्यों
मौन,, जनता रोज नरकीय दर्द झेल रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और नेता मौन क्यों हैं
जवाबदेही,, क्या चंदे से बनने वाली सड़क के बाद भी लोक निर्माण विभाग और जिम्मेदार अधिकारी अपनी कुंभकर्णी नींद से जागेंगे
असरदार बात,, अब समय आ गया है कि खोखले आश्वसनों का दौर बंद हो और तत्काल जमीनी कार्रवाई की जाए, क्योंकि त्रस्त हो चुकी जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि सीधा जवाब और समाधान चाहती है।