एफएसएनएल के सैकड़ों श्रमिकों पर रोजगार का संकट, 30 मार्च को मुर्गा चौक पर हड़ताल

रमेश गुप्ता भिलाई। फेरो स्क्रैप निगम लिमिटेड (FSNL) के सैकड़ों श्रमिकों के सामने रोजगार का संकट गहराता जा रहा है। भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) द्वारा कार्य आवंटन की नई नीति के विरोध में FSNL बचाओ संघर्ष समिति ने 30 मार्च को सेक्टर-1 स्थित मुर्गा चौक पर बड़ी हड़ताल का ऐलान किया है, जिसमें बड़ी संख्या में प्रभावित श्रमिकों के शामिल होने की संभावना है।शनिवार को आयोजित संयुक्त पत्रकार वार्ता में संयोजक मंडल के सदस्य गजेन्द्र सिंह, राजु लाल श्रेष्ठ और अरुण सिंह सिसोदिया ने बताया कि भिलाई स्टील प्लांट द्वारा पूर्व की तरह FSNL को सीधे कार्य देने के बजाय ग्लोबल टेंडर जारी किया गया है।

इस टेंडर को चार हिस्सों में विभाजित किए जाने के कारण FSNL को सीमित कार्य मिला है, जो यहां कार्यरत 800 से अधिक श्रमिकों के लिए पर्याप्त नहीं है।निजीकरण और टेंडर प्रक्रिया पर उठाए सवालसंयोजकों ने आरोप लगाया कि FSNL, जो पहले भारत सरकार का उपक्रम था, उसे विनिवेश नीति के तहत निजीकरण कर जापानी कंपनी कोनोइके ट्रांसपोर्ट कंपनी को कम कीमत पर सौंप दिया गया। उनका दावा है कि कंपनी का वास्तविक बाजार मूल्य इससे कहीं अधिक था। उन्होंने यह भी कहा कि हाल के समय में स्क्रैप से जुड़े कुछ हितों द्वारा FSNL को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है।उन्होंने बताया कि पहले टेंडर एकल पार्टी के सिद्धांत पर आधारित होते थे, लेकिन अब ओपन टेंडर प्रणाली लागू कर दी गई है। हाल ही में लगभग 750 करोड़ रुपये के टेंडर को चार भागों में विभाजित किया गया, जिससे श्रमिकों के हित प्रभावित हुए हैं।श्रमिकों के अधिकारों को लेकर चिंतासंयोजक मंडल के अनुसार, जनवरी में जारी टेंडर में नियमित और ठेका श्रमिकों की नौकरी सुरक्षा तथा सेवा शर्तों का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है, जबकि कार्य की प्रकृति स्थायी है। उन्होंने ठेका संविदा (उन्मूलन) अधिनियम 1970 के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि श्रमिकों को विभागीय रूप से समायोजित किया जाना चाहिए।उन्होंने यह भी मांग की कि ठेकेदार बदलने की स्थिति में किसी भी श्रमिक की छंटनी या स्थानांतरण न किया जाए और सभी को पूर्व वरिष्ठता के साथ कार्य पर बनाए रखा जाए।प्रमुख मांगेंसंघर्ष समिति ने श्रमिक हितों को लेकर कई मांगें रखी हैं, जिनमें—नए टेंडर के बावजूद श्रमिकों की सेवा निरंतर बनाए रखनावेतनमान और सेवा शर्तों में कोई प्रतिकूल बदलाव न करनाकिसी भी श्रमिक की छंटनी या स्थानांतरण न करनानए वेज कोड के तहत नियुक्ति पत्र जारी करनाकेंद्र सरकार के न्यूनतम वेतन का भुगतान सुनिश्चित करनासभी श्रमिकों को वेतन पर्ची, अवकाश (EL, CL) एवं राष्ट्रीय अवकाश का लाभ देनासंघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *