कोर्ट के हस्तक्षेप से दो पुराने मामलों में फिर हलचल, व्यापमं घोटाला और जग्गी हत्याकांड सुर्खियों में

करीब एक दशक से ठंडे बस्ते में पड़े दो बहुचर्चित मामलों में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। एक ओर सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से मध्यप्रदेश का चर्चित व्यापमं घोटाला दोबारा सक्रिय होता दिख रहा है, तो दूसरी ओर रायपुर में रामअवतार जग्गी हत्याकांड की पुनर्जांच शुरू होने जा रही है। इन घटनाक्रमों ने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर नए सिरे से सवाल खड़े कर दिए हैं।

व्यापमं घोटाले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार और CBI को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस कांग्रेस के पूर्व विधायक पारस सकलेचा की याचिका पर जारी हुआ है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2014 में सौंपे गए 320 पन्नों के दस्तावेजों और साक्ष्यों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एन वी अंजरिया की खंडपीठ ने दोनों पक्षों से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत हलफनामा प्रस्तुत करने को कहा है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि इतने वर्षों में जांच की प्रगति क्या रही और चार्जशीट की स्थिति क्या है। इस मामले की अगली सुनवाई 16 अप्रैल को निर्धारित की गई है।

गौरतलब है कि वर्ष 2013 में सामने आए व्यापमं घोटाले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। सरकारी नौकरियों और प्रवेश परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप लगे थे। वर्ष 2015 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सीबीआई ने जांच शुरू की थी, लेकिन समय के साथ यह मामला ठंडा पड़ गया।

इधर, छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में रामअवतार जग्गी हत्याकांड की पुनर्जांच का फैसला भी चर्चा में है। यह मामला लंबे समय तक राजनीतिक और कानूनी विवादों में घिरा रहा है। इस प्रकरण में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी का नाम भी सामने आया था, हालांकि उन्हें अदालत से पहले ही राहत मिल चुकी है। अब पुनर्जांच के आदेश से मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है।

दोनों मामलों में समानता यह है कि समय के साथ जांच की गति धीमी पड़ गई थी और कई अहम सवाल अनुत्तरित रह गए थे। ऐसे में न्यायिक हस्तक्षेप ने इन फाइलों को फिर से खोलने का मार्ग प्रशस्त किया है।

राजनीतिक दृष्टि से भी इन घटनाक्रमों के दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं। व्यापमं घोटाले की पुनर्सक्रियता मध्यप्रदेश की राजनीति में हलचल ला सकती है, वहीं जग्गी हत्याकांड की पुनर्जांच छत्तीसगढ़ में पुराने राजनीतिक विवादों को फिर से जीवित कर सकती है। अब निगाहें अदालत में पेश होने वाले हलफनामों और आगे की जांच प्रक्रिया पर टिकी हैं, जिनसे यह तय होगा कि ये मामले ठोस निष्कर्ष तक पहुंचते हैं या नहीं।

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