केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों को सूचित किया है कि देश में पांच दशकों से अधिक समय तक चले वामपंथी उग्रवाद के बाद अब कोई भी जिला नक्सली हिंसा प्रभावित श्रेणी में नहीं रह गया है। गृह मंत्रालय द्वारा इस महीने की शुरुआत में की गई उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा के बाद यह आधिकारिक घोषणा की गई है। यह सफलता केंद्र सरकार की 2015 में तैयार राष्ट्रीय नीति और कार्य योजना के तहत हासिल हुई है।
मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 31 मार्च के बाद की गई समीक्षा में यह स्पष्ट हुआ है कि देश का कोई भी जिला अब वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित श्रेणी के अंतर्गत नहीं आता है। गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पहले ही संसद को भारत के माओवाद मुक्त होने की जानकारी दी थी। केंद्र सरकार ने इस खतरे को समाप्त करने के लिए 31 मार्च की समयसीमा निर्धारित की थी, जिसे सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।
नया वर्गीकरण और विकास पर जोर
गृह मंत्रालय ने आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल को भेजे पत्र में बताया है कि अब जिलों को नई श्रेणियों में बांटा गया है। इसके तहत 37 जिलों को विरासत और विकास जिले के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जबकि केवल एक जिले को चिंताजनक जिला घोषित किया गया है।
विरासत और विकास जिले वे हैं जो हिंसा से पूरी तरह मुक्त हो चुके हैं। चिंताजनक जिले की श्रेणी में झारखंड का पश्चिम सिंहभूम जिला शामिल है, जहां हिंसा पर नियंत्रण तो पा लिया गया है, लेकिन भविष्य में सुरक्षा और विकास कार्यों की निरंतर निगरानी आवश्यक है।
पांच दशकों का संघर्ष और सफलता
नक्सलवाद की शुरुआत 1967 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी से हुई थी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस हिंसा में अब तक सुरक्षाबलों और नागरिकों सहित 17,000 से अधिक लोगों ने अपनी जान गंवाई है। सरकार का मानना है कि नक्सलवाद से मुक्ति केंद्र और राज्य सरकारों के साझा प्रयासों का परिणाम है, जिससे अब इन क्षेत्रों में विकास के नए रास्ते खुलेंगे।
