नई दिल्ली। जून महीने की शुरुआत के साथ ही आम लोगों की जेब से जुड़े कई महत्वपूर्ण नियम लागू हो गए हैं। इन बदलावों का असर नौकरीपेशा कर्मचारियों, टैक्सपेयर्स, निवेशकों, क्रेडिट कार्ड यूजर्स और डिजिटल भुगतान करने वाले करोड़ों लोगों पर पड़ सकता है। बैंकिंग, टैक्स, यूपीआई और शेयर बाजार से जुड़े नए नियमों को समझना अब पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है।
सबसे अहम बदलाव एडवांस टैक्स को लेकर है। जिन लोगों की अनुमानित टैक्स देनदारी 10 हजार रुपये से अधिक है, उन्हें 15 जून तक वित्त वर्ष 2026-27 के लिए एडवांस टैक्स की पहली किस्त जमा करनी होगी। नियम के अनुसार कुल कर देनदारी का कम से कम 15 प्रतिशत हिस्सा इस तारीख तक जमा करना अनिवार्य है। समय सीमा चूकने पर अतिरिक्त ब्याज देना पड़ सकता है।
पुरानी कर व्यवस्था चुनने वाले वेतनभोगी कर्मचारियों को राहत भी मिली है। छात्रावास भत्ते पर कर छूट की सीमा बढ़ाई गई है। बच्चों की शिक्षा से जुड़े भत्तों में भी बढ़ोतरी की गई है। इसके अलावा कुछ बड़े शहरों में मकान किराया भत्ते से जुड़ी कर छूट का दायरा बढ़ने से कर्मचारियों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
डिजिटल भुगतान को सुरक्षित बनाने के लिए भी बड़ा कदम उठाया गया है। अब किसी मोबाइल नंबर या क्यूआर कोड पर भुगतान करने से पहले स्क्रीन पर लाभार्थी का सत्यापित नाम दिखाई देगा। इससे ऑनलाइन धोखाधड़ी और गलत खाते में पैसे भेजने की घटनाओं पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
क्रेडिट कार्ड उपयोग करने वालों के लिए कुछ सेवाएं महंगी हो सकती हैं। कई बैंकों ने किराया, ईंधन, यूटिलिटी बिल और शिक्षा भुगतान पर मिलने वाले रिवॉर्ड प्वाइंट्स में बदलाव किया है। कुछ मामलों में अतिरिक्त शुल्क भी लागू किया गया है।
वहीं शेयर बाजार के फ्यूचर और ऑप्शन कारोबार में भी नए मार्जिन नियम प्रभावी हो गए हैं। अब निवेशकों को ट्रेडिंग मार्जिन का एक बड़ा हिस्सा नकद के रूप में रखना होगा। इससे जोखिम नियंत्रण को मजबूती मिलेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि जून में लागू हुए ये बदलाव सीधे तौर पर लोगों की बचत, निवेश और मासिक बजट को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में नए नियमों की जानकारी रखना आर्थिक रूप से फायदेमंद साबित होगा।