रायपुर में जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने भारत सरकार के स्व जनगणना पोर्टल में मातृभाषा के कॉलम में ‘छत्तीसगढ़ी भाषा’ को शामिल करने की मांग उठाई है, पार्टी ने जिलाधीश को ज्ञापन सौंपकर कहा कि साढ़े तीन करोड़ छत्तीसगढ़िया जनमानस की भावनाओं का सम्मान जरूरी है, 2007 में छत्तीसगढ़ी को राजभाषा का दर्जा मिल चुका है और इसका समृद्ध साहित्यिक इतिहास 1885 से जुड़ा है, पार्टी का दावा है कि छत्तीसगढ़ और आसपास के राज्यों में बड़ी आबादी दैनिक जीवन में इसी भाषा का उपयोग करती है
भाषाई सर्वे का हवाला, आठवीं अनुसूची में शामिल करने की भी मांग
पार्टी ने कहा कि 2020 के भाषाई सर्वे के अनुसार राज्य में 65 प्रतिशत से अधिक लोग छत्तीसगढ़ी बोलते हैं जबकि हिंदी बोलने वालों का प्रतिशत बेहद कम बताया गया है, इसके बावजूद जनगणना में छत्तीसगढ़ी को स्थान नहीं मिलना बड़ी उपेक्षा है, पार्टी का तर्क है कि जनगणना में भाषा का विकल्प नहीं होने से वास्तविक आंकड़े सामने नहीं आ पाएंगे, इसलिए 2026-27 की जनगणना में इसे अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए, साथ ही प्राथमिक शिक्षा और शासकीय कामकाज में छत्तीसगढ़ी के उपयोग को बढ़ावा देने और संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग भी दोहराई गई है
