नई दिल्ली। भारत में पेट्रोल को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। देश के ईंधन बाजार में अब एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल यानी पेट्रोल में मिलाए जाने वाले अल्कोहल का असर दिखने लगा है। सरकार की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, इस कदम से न केवल भारत का पैसा बचा है, बल्कि देश के किसानों की जेब भी भरी है।
विदेशी मुद्रा की भारी बचत
पेट्रोल की कीमतों और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार ने पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने का अभियान शुरू किया था। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 2014-15 से लेकर मई 2026 तक इस अभियान से देश को 1.90 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। भारत अपनी जरूरत का 88.5 फीसदी कच्चा तेल बाहर से मंगाता है। इस पहल के कारण भारत ने 310 लाख मीट्रिक टन विदेशी तेल का आयात करने के बजाय स्वदेशी ईंधन का उपयोग किया है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों के उतार-चढ़ाव से होने वाले नुकसान में कमी आई है।
किसानों की कमाई में इजाफा
एथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने, मक्के और धान के टूटे हुए चावलों से किया जाता है। जब इन फसलों से एथेनॉल बनता है, तो उसका सीधा लाभ किसानों को मिलता है। इस योजना के तहत किसानों को अब तक 1.6 लाख करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त कमाई हो चुकी है। यह उन किसानों के लिए बड़ी राहत है जो पारंपरिक खेती के साथ-साथ अन्य विकल्पों की तलाश कर रहे थे।
पर्यावरण और प्रदूषण में सुधार
पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने से प्रदूषण का स्तर भी कम हुआ है। एथेनॉल एक ऐसा ईंधन है जो जलने पर सामान्य पेट्रोल की तुलना में कम हानिकारक गैसें छोड़ता है। इससे हवा की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद मिलती है। सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा को और अधिक बढ़ाना है, ताकि पर्यावरण सुरक्षित रहे और विदेशी तेल पर निर्भरता को कम किया जा सके।
क्या आप जानते हैं कि एथेनॉल ब्लेंडिंग आपके वाहन के माइलेज और इंजन की उम्र पर किस तरह का असर डाल सकती है?