मुंगेली के पोखन यादव हत्याकांड में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: तीनों दोषियों की उम्रकैद की सजा बरकरार, बदला लेने के लिए की थी हत्या

बिलासपुर

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से एक बड़ी खबर सामने आ रही है. मुंगेली जिले के बहुचर्चित पोखन यादव हत्याकांड के तीनों दोषियों को तगड़ा झटका लगा है. अदालत ने उनकी अपील को पूरी तरह खारिज करते हुए निचली अदालत द्वारा दी गई उम्रकैद यानी जीवनभर जेल में रहने की सजा को बरकरार रखा है. हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए साफ कहा कि आरोपियों ने अपनी बहन से हुई कथित छेड़छाड़ का बदला लेने के लिए एक सोची-समझी रणनीति के तहत इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया था. यह फैसला चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की बेंच ने सुनाया है.

शराब दुकान के पीछे घेरकर चाकू से गोदकर की थी हत्या

यह पूरा मामला साल 2023 का है. मुंगेली के रहने वाले पोखन यादव पर गांव के ही राजा साहू और दीलू साहू की बहन से कथित तौर पर बदसलूकी करने का आरोप लगा था. इसी बात से गुस्साए आरोपियों ने पहले तो पोखन के पिता लक्ष्मण यादव को जान से मारने की धमकी दी और फिर उसी दिन शाम को घात लगाकर बैठ गए. जब पोखन यादव अपनी ससुराल से वापस लौट रहा था, तभी मुंगेली के अवासपारा में स्थित शराब दुकान के पीछे कच्चे रास्ते पर आरोपियों ने उसे चारों तरफ से घेर लिया. राजा और दीलू ने चाकू से पोखन के गले, सिर और माथे पर ताबड़तोड़ कई वार किए, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई. इस दौरान उनका तीसरा साथी दुर्गेश कुमार साहू वहां पहरा दे रहा था ताकि कोई बीच-बचाव करने न आ सके. वारदात के बाद तीनों फरार हो गए थे, जिन्हें पुलिस ने अगले दिन गिरफ्तार कर लिया था.

मुंगेली कोर्ट ने सुनाई थी सजा, साक्ष्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने भी लगाई मुहर

इस जघन्य अपराध को लेकर मुंगेली सत्र न्यायालय ने पिछले साल 23 जनवरी 2025 को तीनों आरोपियों को हत्या, सबूत मिटाने और आपराधिक साजिश रचने का दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी. दोषियों ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी. हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने अदालत के सामने पुख्ता सबूत पेश किए. इसमें घटना के समय मौके पर मौजूद चश्मदीद गवाह डोमराज यादव का बयान, डॉक्टर की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और एफएसएल रिपोर्ट शामिल थी. एफएसएल यानी फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की वह रिपोर्ट होती है, जो वैज्ञानिक तरीकों से घटनास्थल से मिले खून, फिंगरप्रिंट और हथियारों की जांच कर अपराधियों का जुर्म साबित करती है. हाईकोर्ट ने इन सभी साक्ष्यों को पूरी तरह सही माना और कहा कि तीसरा आरोपी दुर्गेश भी इस पूरी साजिश में बराबर का भागीदार था, इसलिए तीनों की सजा में कोई ढील नहीं दी जा सकती.

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