धार्मिक दृष्टिकोण से सोमवती अमावस्या को बहुत ही चमत्कारी और फलदायी तिथि माना गया है. यह एक ऐसा दुर्लभ संयोग होता है जब आप चंद्रमा के साथ-साथ भगवान शिव को भी आसानी से प्रसन्न कर सकते हैं. सोमवार का दिन महादेव और चंद्रमा दोनों से जुड़ा होने के कारण इस तिथि का महत्व काफी बढ़ जाता है. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से वैवाहिक जीवन में सुख आता है और हर कार्य में सफलता मिलती है. इस बार सोमवती अमावस्या पर कुछ विशेष शुभ योग भी बन रहे हैं, जिससे इसका महत्व दोगुना हो गया है.
जानिए स्नान-दान और शुभ योग का समय
पंचांग के अनुसार इस साल 15 जून यानी सोमवार के दिन सोमवती अमावस्या मनाई जाएगी. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान करने का विशेष महत्व है. सोमवती अमावस्या पर स्नान और दान करने का सबसे उत्तम मुहूर्त सुबह 4 बजकर 03 मिनट से लेकर सुबह 44 बजकर 43 मिनट तक रहेगा. इसके साथ ही इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का बेहद खास निर्माण होने जा रहा है. आसान शब्दों में कहें तो इन योगों में की गई पूजा का फल कभी खाली नहीं जाता है. इस महासंयोग का शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 23 मिनट से शुरू होकर शाम 7 बजकर 08 मिनट तक रहेगा.
बिल्व पत्र से करें शिवलिंग का दिव्य श्रृंगार
इस विशेष दिन भगवान शिव की कृपा पाने के लिए बिल्व पत्र का एक खास उपाय बताया गया है. अगर आपको कहीं से 5 पत्तों वाला बिल्व पत्र मिल जाए, तो वह बेहद पूजनीय माना जाता है. हालांकि 4 पत्तों वाला बिल्व पत्र भी बहुत शुभ फल देता है. उपाय के तौर पर 5 पत्तों वाले बिल्व पत्र में से तीन पत्तों पर चंदन से नमः शिवाय लिखें. इसके साथ ही 108 सामान्य बिल्व पत्रों पर केसर और चंदन की मदद से राम-राम लिखकर शिवलिंग पर अर्पित करें और शिव जी का महाभिषेक करें. ऐसा करने से मन की हर मुराद पूरी होती है. शास्त्रों के अनुसार पूजा के समय पीले कपड़े पहनने से बीमारियां दूर होती हैं और सफेद कपड़ों से विद्या मिलती है. वहीं लाल कपड़े सिद्धियां दिलाते हैं और काले कपड़े पहनने से ग्रहों की बाधा शांत होकर धन की प्राप्ति होती है.
तुलसी पूजा और पीपल की परिक्रमा से दूर होंगे कष्ट
यदि आपके वैवाहिक जीवन में कोई अनबन चल रही है, तो सोमवती अमावस्या के दिन किए गए उपाय आपके लिए रामबाण साबित हो सकते हैं. शाम के समय स्नान करने के बाद तुलसी के पौधे के नीचे गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाएं. इसके बाद रोली, धूप और चावल से तुलसी माता की पूजा करें. एक पान के पत्ते पर थोड़े से धान और साबुत हल्दी रखकर तुलसी के पास चढ़ाएं. इसके बाद नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का मन में जाप करते हुए तुलसी जी की परिक्रमा करें. इसके अलावा इस दिन पीपल के पेड़ की जड़ में जल और फूल चढ़ाकर उसकी 9 बार परिक्रमा करनी चाहिए. हर परिक्रमा के साथ पीपल के तने पर पीला सूत यानी कच्चा धागा लपेटें और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें.
पितरों की शांति और राहु दोष से मुक्ति का उपाय
सोमवती अमावस्या का दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए भी बहुत बड़ा माना गया है. इस दिन उपाय करने से कुंडली में राहु का बुरा असर भी खत्म हो जाता है. इसके लिए घर में चावल, दूध और चीनी मिलाकर मीठी खीर बनाएं. इस खीर को मिट्टी के एक बर्तन में रखकर घर की दक्षिण दिशा में रख दें. इसके बाद दक्षिण दिशा की तरफ मुंह करके पितृभ्यो नमः मंत्र का जाप करें और पितरों से आशीर्वाद मांगें. बाद में इस खीर को किसी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को दान कर दें. अगर संभव हो तो इस दिन कहीं पर पीपल का एक छोटा पौधा जरूर लगाएं.