Ramesh Gupta
दुर्ग। साइबर ठगी के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत दुर्ग पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। थाना पुरानी भिलाई पुलिस और एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट (एसीसीयू) की संयुक्त टीम ने साइबर अपराधियों को कमीशन के बदले बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले 9 म्यूल खाताधारकों और एजेंटों को गिरफ्तार किया है। जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी ₹2 हजार से ₹10 हजार तक के कमीशन के लालच में अपने और अन्य लोगों के बैंक खाते, पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक और सिम कार्ड साइबर ठगों को उपलब्ध कराते थे, जिनका इस्तेमाल ऑनलाइन ठगी की रकम को इधर-उधर ट्रांसफर कर उसका स्रोत छिपाने के लिए किया जाता था।
तकनीकी जांच में खुला साइबर नेटवर्क
पुलिस के अनुसार थाना पुरानी भिलाई में दर्ज अपराध क्रमांक 258/2026 की विवेचना के दौरान बैंक खातों के तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल साक्ष्यों से यह नेटवर्क सामने आया। जांच में संबंधित खातों में साइबर धोखाधड़ी से जुड़ी लाखों रुपये की संदिग्ध ट्रांजेक्शन मिलीं। इसके बाद शनिवार को सभी नौ आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया।
कमीशन लेकर उपलब्ध कराते थे बैंकिंग दस्तावेज
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी आम लोगों से बैंक खाते, पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक और सिम कार्ड लेकर उन्हें साइबर अपराधियों तक पहुंचाते थे। साइबर गिरोह इन्हीं खातों का उपयोग ऑनलाइन ठगी से प्राप्त रकम को विभिन्न खातों में ट्रांसफर करने और बाद में निकालने के लिए करता था, जिससे वास्तविक अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाए।
ये आरोपी हुए गिरफ्तार
गिरफ्तार आरोपियों में लक्की खुटेल (फुंडा), भारत गिरी (गौतम नगर, सुपेला), भोज ठाकुर (खुर्सीडीह), चोमन साहू (खुर्सीडीह), कमलेश देशलहरे (फुंडा), रमाकांत साहू (मचान्दुर), आकाश भट्ट (अहिवारा), संजय निषाद (दानिया, एजेंट) और मनोज कुमार साहू (कुर्सीडीही, एजेंट) शामिल हैं।
बैंकिंग दस्तावेज और मोबाइल जब्त
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक, सिम कार्ड, मोबाइल फोन तथा बैंकिंग से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं। मामले की जांच जारी है और पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाल रही है।
दुर्ग पुलिस की चेतावनी
दुर्ग पुलिस ने आम नागरिकों को आगाह किया है कि अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक या सिम कार्ड किसी भी व्यक्ति को किराये पर देना या उपयोग के लिए उपलब्ध कराना गंभीर अपराध है। ऐसा करने वाले व्यक्ति भी साइबर अपराध में सहयोगी माने जाते हैं और उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाती है। पुलिस ने लोगों से किसी भी लालच में आकर अपने बैंकिंग दस्तावेज किसी को न देने की अपील की है।