वजन सामान्य होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप हाई कोलेस्ट्रॉल के खतरे से पूरी तरह सुरक्षित हैं। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के हालिया ‘ICMR-INDIAB’ अध्ययन में एक बेहद चिंताजनक बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, देश के करीब 87 प्रतिशत वयस्क यानी हर 10 में से लगभग 9 लोग डिस्लिपिडिमिया (असामान्य कोलेस्ट्रॉल) की समस्या से पीड़ित हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि शुरुआती चरण में लक्षण न दिखने के कारण अधिकतर लोगों को इसका पता ही नहीं चलता।
30 से 39 वर्ष के युवाओं में सबसे ज्यादा जोखिम
अध्ययन के लिए देशभर के 23,665 लोगों की लिपिड प्रोफाइल की जांच की गई, जिसमें पाया गया कि असामान्य कोलेस्ट्रॉल की शुरुआत 30 वर्ष की उम्र के आसपास से ही होने लगती है। 30 से 39 वर्ष की आयु वर्ग के लोगों में यह खतरा सबसे अधिक देखा गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रोसेस्ड फूड का अत्यधिक सेवन, शारीरिक गतिविधि की कमी और लंबे समय तक बैठकर काम करने की जीवनशैली इसके मुख्य कारक हैं।
शहरी महिलाओं और मध्य भारत में अधिक मामले
इस अध्ययन में यह भी खुलासा हुआ है कि ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी महिलाओं में यह समस्या अधिक पाई गई है। इसके अलावा, मध्य भारत के निवासियों, डायबिटीज, प्री-डायबिटीज, मोटापे और हाई ब्लड प्रेशर से जूझ रहे मरीजों में डिस्लिपिडिमिया का स्तर काफी बढ़ा हुआ दर्ज किया गया है।
क्या है डिस्लिपिडिमिया और क्यों है खतरनाक?
विशेषज्ञों के मुताबिक, डिस्लिपिडिमिया केवल बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) बढ़ने तक सीमित नहीं है। इसमें गुड कोलेस्ट्रॉल (HDL) का कम होना और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर बढ़ना भी शामिल है। धमनियों में चर्बी जमने से भविष्य में हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
बचाव और विशेषज्ञों की सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि 30 वर्ष की आयु पार करने के बाद हर व्यक्ति को नियमित रूप से लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराना चाहिए, विशेषकर जिनके परिवार में हृदय रोग या डायबिटीज का इतिहास रहा हो। संतुलित खानपान, तली-भुनी चीजों से परहेज, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और धूम्रपान व शराब से दूरी बनाकर इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।