झारखंड की राजनीति से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। राज्य सरकार में कांग्रेस कोटे से सबसे सीनियर और कैबिनेट में नंबर 2 की हैसियत रखने वाले वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर पुलिस मुख्यालय के रवैये से बुरी तरह नाराज हो गए हैं। इस नाराजगी के चलते उन्होंने एक बहुत बड़ा कदम उठाते हुए अपनी सुरक्षा में तैनात सभी जवानों और गाड़ियों को राज्य सरकार को वापस कर दिया है। सरकार के इतने बड़े और वरिष्ठ मंत्री द्वारा अचानक उठाए गए इस कदम से पूरा पुलिस महकमा और प्रशासनिक अमला पूरी तरह हैरान रह गया है।
काफिले के लिए मांगी थी अतिरिक्त गाड़ी, नहीं मिला कोई जवाब
सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर पिछले कुछ समय से पुलिस मुख्यालय द्वारा अपनी अनदेखी किए जाने से काफी खफा चल रहे थे। हालांकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से इस बात को लेकर कभी कोई बयान नहीं दिया था, लेकिन पिछले दिनों उन्होंने राज्य के पुलिस महानिदेशक यानी डीजीपी को एक आधिकारिक पत्र लिखा था। इस पत्र में मंत्री ने अपनी सुरक्षा में चलने वाले काफिले के लिए एक अतिरिक्त वाहन यानी एस्कॉर्ट गाड़ी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। माना जा रहा है कि उनके इस पत्र पर पुलिस मुख्यालय द्वारा काफी समय बीत जाने के बाद भी कोई फैसला नहीं लिया गया, जिससे नाराज होकर उन्होंने यह सख्त कदम उठाया।
16 जवानों और 3 गाड़ियों को वापस भेजा, सचिवालय भी बिना सुरक्षा पहुंचे
अपनी इसी अनदेखी से आहत होकर वित्त मंत्री ने शुक्रवार को एक बड़ा फैसला लिया। उन्होंने अपनी सुरक्षा में मुस्तैद रहने वाले सभी 16 सुरक्षा गार्डों को लाइन हाजिर होने के लिए कह दिया और उनके लिए आवंटित की गई 3 सुरक्षा गाड़ियों को भी तुरंत राज्य सरकार को सरेंडर कर दिया। शुक्रवार की सुबह मंत्री सबसे पहले खेल गांव स्टेडियम में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। इसके बाद वे वहां से सीधे प्रोजेक्ट भवन स्थित सचिवालय के लिए रवाना हुए, लेकिन इस पूरे सफर के दौरान उनके आगे-पीछे कोई भी सुरक्षाकर्मी या पायलट गाड़ी दिखाई नहीं दी। वे बिल्कुल एक आम नागरिक की तरह बिना किसी सुरक्षा के सचिवालय पहुंचे।
सुरक्षा के लिहाज से गाड़ियों का यह काफिला सही नहीं
वित्त मंत्री के बेहद करीबी लोगों का कहना है कि सरकार की तरफ से जो गाड़ियां आवंटित की गई थीं, उनमें सुरक्षा जवानों को बहुत ही असुविधाजनक तरीके से यानी ठूंस-ठूंस कर बैठना पड़ता था। लंबी दूरी के सफर में जवानों को इससे काफी परेशानी होती थी। इस पूरे विवाद और अपने फैसले के पीछे वित्त मंत्री ने तर्क दिया है कि महज 16 सुरक्षाकर्मियों की आवाजाही के लिए 3 बड़े वाहनों का भारी-भरकम काफिला रखना सुरक्षा के दृष्टिकोण से सही नहीं है। उन्होंने इसे पूरी तरह से अव्यावहारिक बताया है। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री और डीजीपी इस हाई-प्रोफाइल मामले को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।