पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर कई ऐसे चौंकाने वाले वीडियो खूब वायरल हो रहे हैं, जिनमें कोई अनजान शख्स अपने मोबाइल से बीच सड़क पर चलते हुए ई-रिक्शा को अचानक बंद कर देता है. इसके बाद बेचारा ड्राइवर परेशान होकर बीच रास्ते में खड़ा रह जाता है. वह समझ ही नहीं पाता कि आखिर उसकी भली-चलाती गाड़ी को क्या हुआ. इन वायरल वीडियो के पीछे चीन का एक मोबाइल ऐप था, जिसका नाम बैट-बीएमएस है. अब इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार पूरी तरह हरकत में आ गई है और सुरक्षा को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है.
अब ऐप स्टोर से हमेशा के लिए गायब होंगे ऐसे ऐप्स
सरकार की ओर से इस मामले पर बड़ी कार्रवाई की पुष्टि की गई है. ई-रिक्शा को दूर से बंद करने की सुविधा देने वाले दो चीनी ऐप्स को पूरी तरह से ब्लॉक करके ऐप स्टोर से हटा दिया गया है. सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि वे इस गंभीर मुद्दे को ऐप स्टोर चलाने वाली बड़ी कंपनियों के सामने भी उठाएंगे. सरकार का असली मकसद सिर्फ इन ऐप्स को हटाना ही नहीं है, बल्कि आगे के लिए भी ऐसा रास्ता बंद करना है जिससे कोई भी नुकसान पहुंचाने वाला ऐप दोबारा स्टोर पर आ ही न सके.
आखिर कैसे काम करता है चाइनीज ऐप और बैटरी का यह खेल
इस गड़बड़ी के पीछे की तकनीक को आसान भाषा में समझें तो बैट-बीएमएस ऐप को चीन की एक कंपनी शेन्ज़ेन ग्रीनर्जी टेक्नोलॉजी ने बनाया है. इस ऐप का मुख्य काम गाड़ी में लगी बैटरी की चार्जिंग, उसका तापमान और वोल्टेज जैसी जरूरी जानकारियां मोबाइल स्क्रीन पर दिखाना है. लेकिन भारत में बिकने वाले कई सस्ते ई-रिक्शा में जो चीनी लिथियम बैटरी लगी होती हैं, उनके बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम यानी बीएमएस में कोई सुरक्षा या पासवर्ड लॉक नहीं होता. बीएमएस का मतलब बैटरी को सुरक्षित रखने वाला एक डिजिटल सिस्टम होता है. सुरक्षा न होने के कारण इन गाड़ियों का ब्लूटूथ 10 से 15 मीटर की दूरी तक किसी भी दूसरे मोबाइल फोन से आसानी से जुड़ जाता है. इस ऐप में मरम्मत के समय इस्तेमाल होने वाला एक स्विच ऑफ फीचर था, जिसका शरारती तत्व गलत फायदा उठाकर गाड़ियों की बिजली काट रहे हैं.
सभी गाड़ियों को डरने की जरूरत नहीं, लेड-एसिड बैटरी पूरी तरह सुरक्षित
इस खबर के बीच राहत की बात यह है कि यह खतरा देश के सभी ई-रिक्शा पर लागू नहीं होता है. जो पुराने ई-रिक्शा लेड-एसिड यानी तेजाब और पानी वाली पारंपरिक बैटरी पर चलते हैं, उनमें ब्लूटूथ की कोई सुविधा होती ही नहीं है. इसलिए वे गाड़ियां सड़कों पर पूरी तरह सुरक्षित हैं. इसके अलावा देश की कई बड़ी कंपनियां अपनी लिथियम बैटरी में खुद का सुरक्षित सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करती हैं, जिन पर चीन का यह ऐप काम ही नहीं करता है. यह खतरा सिर्फ उन बेहद सस्ती बैटरियों पर मंडरा रहा है, जिनमें कोई पासवर्ड सेटिंग नहीं की गई है. विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि चलती गाड़ी के ब्लूटूथ से जुड़ना और भीड़भाड़ में सही डिवाइस को ढूंढना उतना आसान भी नहीं है, जितना वीडियो में दिखाया जा रहा है.
बिना इजाजत गाड़ी बंद की तो 3 साल की होगी जेल
इस पूरे मामले पर देश के बड़े साइबर कानून विशेषज्ञों का कहना है कि किसी की गाड़ी की बैटरी से उसकी मर्जी के बिना छेड़छाड़ करना एक गंभीर जुर्म है. आज के समय में ई-रिक्शा भी एक तरह का कंप्यूटर सिस्टम है. भारत के सूचना प्रौद्योगिकी कानून यानी आईटी एक्ट की धारा 43 और 66 के तहत किसी की डिजिटल डिवाइस में बिना इजाजत दखल देना अपराध है. ऐसा करने वाले को 3 साल तक की जेल की सजा और 5 लाख रुपये तक का भारी जुर्माना हो सकता है. सरकार के पास भी आईटी कानून की धारा 69ए के तहत देश की सुरक्षा को खतरा पहुंचाने वाले ऐसे किसी भी ऐप को हमेशा के लिए ब्लॉक करने का पूरा अधिकार है.
भविष्य में कंपनियों को लगाने होंगे मजबूत पासवर्ड
सड़क सुरक्षा और तकनीकी जानकारों का मानना है कि इस समस्या का सबसे पक्का और असली हल यही है कि बैटरी बनाने वाली कंपनियां अपनी बैटरियों में पहले से ही मजबूत पासवर्ड और सुरक्षा कोड लगाकर बेचें. ऐसा होने से बाद में किसी भी बाहरी इंसान को गाड़ी के सिस्टम के साथ छेड़छाड़ करने का कोई मौका ही नहीं मिलेगा. फिलहाल सरकार की पैनी नजर इस पूरे मामले पर बनी हुई है. दो ऐप्स को हटाने के बाद अब सरकार ऐप स्टोर कंपनियों के साथ मिलकर कड़े नियम बनाने की तैयारी कर रही है ताकि गरीब ड्राइवरों की गाड़ियां सड़कों पर सुरक्षित रह सकें.