चारामा (उत्तर बस्तर कांकेर)।
कोटवार एसोसिएशन ऑफ छत्तीसगढ़ के प्रांतीय आह्वान पर आज पूरे जिले सहित चारामा विकासखंड में कोटवारों ने अपनी ज्वलंत और लंबित समस्याओं को लेकर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। यह धरना प्रदर्शन चारामा जनपद पंचायत कार्यालय के सामने आयोजित किया गया, जिसमें पूरे विकासखंड के सैकड़ों कोटवार एकजुट हुए और शासन-प्रशासन के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की।
इस प्रदर्शन में कोटवार संघ के जिला अध्यक्ष मेहत्तर राम टांडिया सहित संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी, तहसील अध्यक्ष और भारी संख्या में महिला व पुरुष कोटवार उपस्थित रहे। धरना प्रदर्शन के पश्चात कोटवारों ने प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम एक विस्तृत मांग पत्र स्थानीय तहसीलदार महोदय के माध्यम से सौंपा।

राजस्व विभाग में संविलियन और नियमितीकरण की मुख्य मांग
सौंपे गए ज्ञापन में कोटवारों ने दुख व्यक्त करते हुए बताया कि वे अंग्रेजी शासनकाल से पीढ़ी-दर-पीढ़ी शासन, प्रशासन और आम जनता की निष्काम सेवा करते आ रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें आज तक नियमित कर्मचारी का दर्जा प्राप्त नहीं हुआ है, जिसके कारण लंबे समय तक सेवा करने के बाद भी वे पेंशन और ग्रेच्युटी जैसी शासकीय योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। बुढ़ापे में उन्हें आत्मग्लानि की जिंदगी गुजारनी पड़ रही है।
कोटवारों ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले का हवाला देते हुए मांग की है कि 10 वर्ष की सेवा अवधि पूरी कर चुके सभी अस्थाई कर्मचारियों की तर्ज पर कोटवारों को भी नियमित करते हुए तत्काल ‘राजस्व विभाग’ में संविलियन किया जाए।

बढ़ती महंगाई के अनुपात में पारिश्रमिक बढ़ाने की मांग
कोटवारों ने वर्तमान में मिल रहे मानदेय को इस कमरतोड़ महंगाई में बहुत ही कम बताया और मांग की कि सेवा भूमि के आधार पर मिलने वाले पारिश्रमिक को तत्काल संशोधित किया जाए। उनकी मांगें इस प्रकार हैं:
श्रेणी (A): जिनके पास कोई सेवा भूमि नहीं है, उनका पारिश्रमिक 6,000/- रुपये से बढ़ाकर 15,000/- रुपये प्रति माह किया जाए।
Ref श्रेणी (B): जिनके पास 3 एकड़ से अधिक भूमि है, उनका मानदेय 5,500/- रुपये से बढ़ाकर 12,000/- रुपये किया जाए।
श्रेणी (C): 7.50 से 10 एकड़ सेवा भूमि वालों का मानदेय 4,500/- रुपये से बढ़ाकर 10,000/- रुपये किया जाए।
श्रेणी (D): 10 एकड़ से अधिक सेवा भूमि वाले कोटवारों का मानदेय 3,000/- रुपये से बढ़ाकर 8,000/- रुपये प्रति माह किया जाए।
भ्रष्टाचार, एकतरफा निलंबन और बेगारी पर रोक लगाने की मांग
धरना स्थल पर संघ के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि कुछ स्थानीय राजस्व अधिकारियों द्वारा कोटवारों से मूल कर्तव्यों के अलावा जबरन बेगारी (बिना भुगतान के अन्य काम) कराई जाती है, और बात न मानने पर कार्रवाई की धमकी दी जाती है। इस पर तुरंत रोक लगाई जाए। इसके साथ ही निम्नलिखित प्रमुख मांगें भी रखी गईं:
वंशज को प्राथमिकता: कोटवार की सेवानिवृत्ति या मृत्यु के बाद उनके ही परिवार (वंशज) के सदस्य को प्राथमिकता के आधार पर नियुक्त किया जाए। पैसे के लेनदेन और भ्रष्टाचार के दम पर बाहरी लोगों को की जा रही नियुक्तियों पर तत्काल रोक लगे।
बिना जांच कार्रवाई पर रोक: राजस्व अधिकारियों द्वारा बिना किसी जांच और कोटवारों का पक्ष सुने, उन्हें सीधे निलंबित या पदमुक्त करने की एकतरफा कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए।
नगरीय निकायों में नियुक्ति: नगर पालिका और नगर निगम क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले कोटवारों की नियुक्ति पर लगा प्रतिबंध तुरंत हटाया जाए।
धरने में ये रहे शामिल
आज के इस एक दिवसीय धरने और प्रदर्शन में मुख्य रूप से शामिल रहे:
श्री मेहत्तर राम टांडिया (जिला अध्यक्ष, कोटवार संघ)
रामाधीन कुलदीप (जिला सचिव)
प्रेम किशोर बाघ (प्रांताध्यक्ष)
मोहर दास मानिकपुरी (सचिव)
पन्नालाल सोनवानी (अध्यक्ष)
विकासखंड के पदाधिकारी: श्री सन्तु दास नवरंग, श्री अरविन्द मंडावी, श्रीमती माहेश्वरी टांडिया, श्री संतोष मंडावी एवं चारामा विकासखंड के समस्त कोटवार साथी भारी संख्या में उपस्थित रहे।
उग्र आंदोलन की चेतावनी:
कोटवार संघ ने शासन को दोटूक चेतावनी दी है कि यदि उनकी इन बुनियादी व मानवीय मांगों पर जल्द ही सहानुभूतिपूर्वक विचार कर आदेश जारी नहीं किए गए, तो आने वाले समय में वे उग्र आंदोलन और अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को विवश होंगे।