सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से एक बेहद परेशान करने वाली खबर सामने आ रही है। पहाड़ों और घने जंगलों के बीच ऊंचे शिखर पर बसे प्रसिद्ध कुदरगढ़ी माता मंदिर परिसर में शुक्रवार को अचानक भीषण आग लग गई। आग लगते ही पूरे धाम परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं, पुजारियों और दुकानदारों के बीच चीख-पुकार और हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि मंदिर प्रांगण के बाहर जलती हुई अगरबत्तियों की चिंगारी से यह हादसा हुआ। सबसे बड़ी लापरवाही यह सामने आई है कि इतने बड़े धार्मिक स्थल पर आग बुझाने के लिए एक भी अग्निशमन यंत्र (Fire Extinguisher) मौजूद नहीं था।
अगरबत्ती की चिंगारी से भड़की आग, ज्योति कलश भवन को लिया चपेट में
प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी के मुताबिक, मंदिर परिसर में जहां श्रद्धालु नारियल फोड़ते हैं, ठीक उसी के पास अगरबत्ती जलाने की जगह भी बनी हुई है। शुक्रवार को भी रोज की तरह बड़ी संख्या में भक्त मां बागेश्वरी के दर्शन के लिए पहुंचे थे।
इसी दौरान जलती हुई अगरबत्तियों के ढेर से उठी एक चिंगारी ने पास रखे वीआईपी और अन्य सामानों को पकड़ लिया। देखते ही देखते आग की लपटों ने विकराल रूप धारण कर लिया और पास में स्थित ज्योति कलश भवन (Jyoti Kalash Bhavan) को भी अपनी चपेट में ले लिया। हवा तेज होने के कारण आग तेजी से फैलती चली गई।
400 साल पुराना है इतिहास, राजा बालंद ने की थी स्थापना
“कुदरगढ़ धाम का इतिहास बेहद गौरवशाली और करीब 400 साल पुराना है। ऐसी मान्यता है कि यह क्षेत्र मां भगवती पार्वती की पवित्र तपस्थली रहा है, जहां माता ने राक्षसों का संहार किया था। करीब चार सदी पहले राजा बालंद ने यहाँ माता बागेश्वरी की मूर्ति स्थापित की थी। बाद में चौहान वंश के राजाओं ने बालंद को युद्ध में हराकर मंदिर की देखरेख संभाली। आज भी हर नवरात्रि में सुबह की पहली आरती चौहान वंश के वंशज ही करते हैं।”