आस्ट्रेलिया से सुभाष मिश्र

कभी कहा जाता था कि ब्रिटिश साम्राज्य का सूर्य कभी अस्त नहीं होता। यह केवल एक कहावत नहीं, बल्कि उस विशाल विस्तार का संकेत था जहाँ-जहाँ ब्रिटेन की सत्ता, व्यापार और नौसैनिक शक्ति पहुँची। ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापारिक कदमों से शुरू हुई कहानी धीरे-धीरे एशिया, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका तक फैलती चली गई। आज वे देश स्वतंत्र हैं, पर उनके शहरों की सड़कों, इमारतों, संस्थानों और खेल के मैदानों में उस इतिहास की परछाइयाँ अब भी देखी जा सकती हैं।
भारत: भाषा, रेल और औपनिवेशिक ढाँचा
भारत में अंग्रेजी राज की चर्चा करते हुए अक्सर कहा जाता है—अंग्रेज चले गए, औलाद छोड़ गए। यह वाक्य केवल भाषा के संदर्भ में नहीं, बल्कि संस्थागत ढाँचे के अर्थ में भी कहा जाता है। रेलवे लाइनों का जाल, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई की औपनिवेशिक इमारतें, न्याय-प्रणाली की संरचना, विश्वविद्यालयों की परंपरा—ये सब उस दौर की विरासत हैं।
हालाँकि इन संरचनाओं का मूल उद्देश्य संसाधनों का दोहन था—रेलमार्ग कच्चे माल को बंदरगाहों तक पहुँचाने के लिए बने—पर समय के साथ वे स्वतंत्र भारत की विकास-धारा का हिस्सा बन गए।
भारत के विभाजन के बाद बने पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी वही प्रशासनिक और कानूनी ढाँचे, रेलवे स्टेशन, क्लब और चर्च दिखाई देते हैं। क्रिकेट, जो ब्रिटिश साम्राज्य का सांस्कृतिक निर्यात था, आज इन देशों की राष्ट्रीय पहचान का हिस्सा है।

ऑस्ट्रेलिया: दंड-उपनिवेश से आधुनिक राष्ट्र तक
आप ऑस्ट्रेलिया में हैं, इसलिए वहाँ की उपस्थिति और भी स्पष्ट दिखती है। ऑस्ट्रेलिया में ब्रिटिश आगमन 18वीं सदी के अंत में दंड-उपनिवेश के रूप में हुआ। कैदियों को लाकर बसाया गया, और धीरे-धीरे यूरोपीय बसाहट ने मूल आदिवासी आबादी को हाशिए पर धकेल दिया।
विक्टोरिया राज्य और महारानी की छाया
ऑस्ट्रेलिया का एक राज्य ही विक्टोरिया कहलाता है—जिसका नाम क्वीन विक्टोरिया के नाम पर रखा गया। राजधानी मेलबर्न की स्थापत्य शैली—भव्य संसद भवन, पुरानी लाइब्रेरी, रेलवे स्टेशन—सब विक्टोरियन वास्तुकला की मिसाल हैं।
सिडनी में आप जब सिडनी के हृदयस्थल में क्वीन विक्टोरिया बिल्डिंग को देखते हैं, तो समझ में आता है कि यह नामकरण केवल औपचारिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक स्मृति का हिस्सा है। हाइड पार्क में क्वीन एलिज़ाबेथ द्वितीय की प्रतिमा हो या औपनिवेशिक काल के क्लब—जैसे 1820 के दशक में स्थापित संस्थाएँ—आज वे आधुनिक होटल, रेस्तरां या सांस्कृतिक केंद्र बन चुकी हैं, पर उनकी दीवारों पर इतिहास की परतें जमी हैं।

आप जिस 1826 में बने क्लब का उल्लेख कर रहे हैं, वह इस बात का उदाहरण है कि किस तरह अंग्रेज अधिकारियों ने अपने सामाजिक जीवन के लिए विशिष्ट संस्थाएँ बनाई थीं—क्लब संस्कृति, घुड़दौड़, क्रिकेट मैदान—ये सब ब्रिटिश जीवनशैली के विस्तार थे।
क्या आज भी ब्रिटिश राज की उपस्थिति है?
आज ऑस्ट्रेलिया एक स्वतंत्र राष्ट्र है, पर यह कॉमनवेल्थ ऑफ नेशंस का सदस्य है। ब्रिटेन की महारानी (अब राजा) औपचारिक रूप से हेड ऑफ स्टेट रहे हैं, जिनका प्रतिनिधित्व गवर्नर-जनरल करते हैं। यह उपस्थिति राजनीतिक शासन नहीं, बल्कि संवैधानिक प्रतीक के रूप में है। ऑस्ट्रेलिया में कई बार गणतंत्र बनने पर जनमत-संग्रह की बहस भी उठी है।
ब्रिटेन को इन देशों से प्रत्यक्ष रेवेन्यू नहीं मिलता। संबंध अब व्यापार, शिक्षा, रक्षा-सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के आधार पर हैं। ब्रिटेन स्वयं भी वैश्विक प्रतिस्पर्धा और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है; उसका साम्राज्य अब इतिहास है, पर नेटवर्क—भाषा, कानूनी प्रणाली, खेल—अब भी जीवित हैं।
दुनिया के वे देश जहाँ ब्रिटिश शासन रहा
ब्रिटिश साम्राज्य का विस्तार विशाल था। कुछ प्रमुख देश-
कनाडा
न्यूज़ीलैंड
दक्षिण अफ्रीका
केन्या
मलेशिया
सिंगापुर
श्रीलंका
म्यांमार
नाइजीरिया
इन देशों में अंग्रेजी भाषा, संसदीय लोकतंत्र की संरचना, कॉमन लॉ प्रणाली, क्रिकेट या रग्बी जैसे खेल और औपनिवेशिक स्थापत्य आज भी दिखते हैं।
स्थापत्य और सांस्कृतिक रंग
औपनिवेशिक वास्तुकला में ऊंची छतें, स्तंभयुक्त बरामदे, पत्थर की भव्यता और सार्वजनिक भवनों की शास्त्रीय शैली प्रमुख थी। भारत में मुंबई का विक्टोरियन टर्मिनस (अब छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस), कोलकाता की राजभवन इमारतें; ऑस्ट्रेलिया में मेलबर्न की संसद और सिडनी की पुरानी इमारतें—ये सब उस यूरोपीय रंग के प्रतीक हैं।
साम्राज्य का सिकुडऩा, प्रभाव का बने रहना
ब्रिटेन का राजनीतिक साम्राज्य भले सिमट गया, पर उसका सांस्कृतिक प्रभाव बना हुआ है। अंग्रेजी आज वैश्विक संपर्क भाषा है। कॉमनवेल्थ देशों के बीच शिक्षा और व्यापार के मजबूत रिश्ते हैं पर साथ ही, उपनिवेशवाद की आलोचना भी तेज हुई है—मूल निवासियों के अधिकार, संसाधनों के दोहन और सांस्कृतिक दमन पर गंभीर विमर्श चल रहा है। ऑस्ट्रेलिया में आदिवासी इतिहास को लेकर माफी और पुनर्स्मरण की प्रक्रिया इसका उदाहरण है।
यात्रा-वृत्तांत के लिए संभावित संरचना
आप अपने आलेख में इस तरह बुनावट कर सकते हैं-
सिडनी के किसी औपनिवेशिक क्लब में प्रवेश का दृश्य—लकड़ी की पुरानी सीढिय़ाँ, दीवारों पर टंगे चित्र। बाहर हाइड पार्क में एलिज़ाबेथ की प्रतिमा। मेलबर्न की संसद और विक्टोरियन इमारतों का वर्णन। भारत के रेलवे स्टेशन या कोलकाता की इमारत से तुलना। क्रिकेट मैच का दृश्य—कैसे एक खेल ने उपनिवेशों को जोड़ा। निष्कर्ष की जगह एक खुला प्रश्न—क्या यह केवल इतिहास है, या आज भी हमारे शहरों की आत्मा में बसा हुआ वर्तमान?
इस तरह आपका यात्रा-वृत्तांत केवल इमारतों का विवरण नहीं रहेगा, बल्कि साम्राज्य, स्मृति और आधुनिकता के बीच संवाद बन जाएगा—जहाँ ऑस्ट्रेलिया और भारत एक साझा इतिहास की अलग-अलग अभिव्यक्तियाँ बनकर सामने आते हैं।