रायपुर, 22 जनवरी 2026: छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के नगर पालिक परिषदों और नगर पंचायतों का लगभग 45 वर्षों बाद आय के आधार पर वर्गीकरण किया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार छत्तीसगढ़ नगरपालिका सेवा (वेतनमान एवं भत्ते) नियम, 1967 में संशोधन कर नियम-3 को प्रतिस्थापित किया गया है। अब नगरीय निकायों की श्रेणी उनकी वार्षिक आय के आधार पर तय की जाएगी।
यह वर्गीकरण वर्ष 1980 के बाद पहली बार किया गया है। इससे पहले नगर निकायों की श्रेणियां पुरानी व्यवस्था के अनुसार निर्धारित थीं। नई व्यवस्था के तहत नगर पालिक परिषदों और नगर पंचायतों को चार श्रेणियों में बांटा गया है—
श्रेणी क: वार्षिक आय 4 करोड़ रुपये या उससे अधिक वाली निकाय।
श्रेणी ख: वार्षिक आय 2 करोड़ रुपये या उससे अधिक लेकिन 4 करोड़ रुपये से कम वाली निकाय।
श्रेणी ग: वार्षिक आय 90 लाख रुपये या उससे अधिक लेकिन 2 करोड़ रुपये से कम वाली निकाय।
श्रेणी घ: वार्षिक आय 90 लाख रुपये से कम वाली निकाय।
अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि वार्षिक आय में निकाय की समस्त आय शामिल होगी, लेकिन कुछ विशिष्ट प्रयोजनों के लिए प्राप्त सहायता अनुदान को इसमें नहीं जोड़ा जाएगा।
सरकार का यह फैसला नगरीय निकायों की आर्थिक स्थिति के अनुरूप वर्गीकरण को अधिक पारदर्शी और व्यावहारिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतनमान, भत्तों तथा अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं में एकरूपता आएगी। साथ ही निकायों के वित्तीय प्रदर्शन के आधार पर उन्हें बेहतर ढंग से श्रेणीबद्ध किया जा सकेगा।
यह निर्णय नगरीय प्रशासन को मजबूत करने, वित्तीय अनुशासन लाने और शहरी स्थानीय निकायों के संचालन में स्पष्टता बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है।