अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर से एक बेहद चौंकाने वाली और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। न्यूयॉर्क के मैनहट्टन इलाके में स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय यानी यूएन बिल्डिंग के ठीक बाहर गुरुवार को तिब्बती झंडा लिए एक व्यक्ति ने चीन के विरोध में खुद को आग लगा ली। इस आत्मदाह की घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। मृतक प्रदर्शनकारी की पहचान उसके एक बेहद करीबी दोस्त ने लोबगा रंगजेन के रूप में की है। मिली जानकारी के मुताबिक लोबगा करीब 20 साल से अमेरिका में रह रहा था।
शाम की भीड़ के बीच फुटपाथ पर रखा तिब्बती झंडा
एक अमेरिकी समाचार पत्र की रिपोर्ट के अनुसार यह खौफनाक घटना गुरुवार शाम करीब 7 बजे न्यूयॉर्क शहर की ईस्ट 43rd स्ट्रीट और फर्स्ट एवेन्यू के चौराहे के पास हुई। घटना के बाद जब पुलिस ने वहां लगे सुरक्षा कैमरों यानी सर्विलांस फुटेज की जांच की, तो उसमें रंगजेन पारंपरिक बौद्ध भिक्षु के कपड़े पहने हुए दिखाई दिया। उसने शाम की व्यस्त और भीड़-भाड़ वाली सड़क पर खुद को आग लगाने से ठीक पहले फुटपाथ पर बड़े ही सम्मान के साथ तिब्बती झंडा रखा था।
सुरक्षाकर्मियों ने 15 सेकंड में बुझाई आग, अस्पताल में तोड़ा दम
कैमरे में रिकॉर्ड हुई तस्वीरों के मुताबिक आग की तेज लपटों में घिरने के एक मिनट से भी कम समय में वह दर्द के मारे सड़क पर ही गिर पड़ा। हैरान करने वाली बात यह रही कि इस दौरान सड़क पर गाड़ियां लगातार चलती रहीं और लोग हॉर्न बजाते रहे। वहां तैनात पुलिस अधिकारी और संयुक्त राष्ट्र के सुरक्षाकर्मी तुरंत दौड़कर मौके पर पहुंचे। उन्होंने मुस्तैदी दिखाते हुए महज 15 सेकंड के भीतर आग को पूरी तरह बुझा दिया। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि गंभीर रूप से झुलसे भिक्षु को तुरंत पास के बेलेव्यू अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पर्चे पर लिखा था चीन तिब्बत से बाहर जाए
घटना के बाद पुलिस ने सुरक्षा के लिहाज से पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी थी और लगभग 1 घंटे तक वह तिब्बती झंडा उसी जगह पर पड़ा रहा। छानबीन के दौरान पुलिस को घटनास्थल से कई पर्चे बिखरे हुए मिले। पुलिस ने उन सभी पर्चों को अपने कब्जे में ले लिया है। जांच में सामने आया कि एक पर्चे पर साफ अक्षरों में नारा लिखा था कि चीन तिब्बत से बाहर जाए। यह नारा आमतौर पर तिब्बती स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा हुआ है, जिसे दुनिया भर में फ्री तिब्बत अभियान के नाम से जाना जाता है।
अब तक 150 से ज्यादा लोग दे चुके हैं अपनी जान
फ्री तिब्बत संस्था के आंकड़ों के अनुसार साल 2009 से लेकर अब तक 150 से ज्यादा तिब्बती नागरिक तिब्बत पर चीनी शासन और उसके अत्याचारों के विरोध में इसी तरह आत्मदाह करके अपनी जान दे चुके हैं। यह पूरा आंदोलन तिब्बतियों के अपने फैसले खुद लेने के अधिकार को वापस पाने के लिए लड़ा जा रहा है। इसके साथ ही इस आंदोलन से जुड़े लोग तिब्बती बौद्ध धर्म के सबसे बड़े आध्यात्मिक नेता दलाई लामा की तिब्बत में सुरक्षित वापसी की मांग भी लंबे समय से कर रहे हैं। न्यूयॉर्क पुलिस इस पूरे मामले की अंतरराष्ट्रीय पहलुओं से भी जांच कर रही है।