देश के सबसे बड़े बिजनेस ग्रुप रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कंपनी के भविष्य और इसकी कमान को लेकर एक बहुत बड़ा एलान किया है. कंपनी की सालाना आम बैठक में शेयरधारकों को संबोधित करते हुए मुकेश अंबानी ने साफ कर दिया कि रिलायंस में रोजमर्रा के कामकाज को अगली पीढ़ी को सौंपने यानी डेली मैनेजमेंट ट्रांसफर का काम अब अपने आखिरी चरण में पहुंच चुका है. मुकेश अंबानी के इस बयान से साफ संकेत मिल रहे हैं कि ऊर्जा से लेकर रिटेल और टेलीकॉम तक फैले इस विशाल साम्राज्य में उत्तराधिकार की प्रक्रिया लगभग पूरी होने वाली है.
तीन शरीर और एक आत्मा हैं आकाश, ईशा और अनंत; कभी नहीं बंटेगा बिजनेस
मुकेश अंबानी ने मीटिंग में बताया कि उनके तीनों बच्चे – आकाश, ईशा और अनंत रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के बोर्ड में अपने तीन-तीन साल पूरे कर चुके हैं. ये तीनों अब कंपनी के सबसे मुख्य बिजनेस को पूरी जिम्मेदारी के साथ संभाल रहे हैं. उन्होंने बताया कि आकाश अंबानी पूरे टेलीकॉम और टेक बिजनेस को देख रहे हैं. ईशा अंबानी रिटेल बिजनेस की कमान संभाल रही हैं और अनंत अंबानी पूरी तरह से एनर्जी यानी ऊर्जा सेक्टर का काम देख रहे हैं. अंबानी ने इस बात पर सबसे ज्यादा भरोसा जताया कि नई पीढ़ी के आने के बाद भी रिलायंस ग्रुप पूरी तरह एकजुट रहेगा. उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि उनके तीनों बच्चे तीन शरीर और एक आत्मा की तरह हैं, जिनकी जान रिलायंस में बसती है और यह ग्रुप आगे कभी भी आपस में नहीं बंटेगा.
मुकेश अंबानी खुद भी रहेंगे एक्टिव, पांच सौ युवा लीडर्स की फौज तैयार
उत्तराधिकार की बात करते हुए मुकेश अंबानी ने निवेशकों और शेयरधारकों की चिंता को भी दूर किया. उन्होंने साफ किया कि भले ही रोजमर्रा की जिम्मेदारियां बच्चों के पास जा रही हैं, लेकिन वे खुद भी कंपनी में पूरी तरह एक्टिव यानी सक्रिय रहेंगे और बड़े नीतिगत फैसलों में अपनी भूमिका निभाते रहेंगे. आपको बता दें कि मुकेश अंबानी का वर्तमान कार्यकाल अप्रैल 2029 तक है. इसके साथ ही उन्होंने एक और बड़ी जानकारी दी कि रिलायंस ग्रुप ने अपने अलग-अलग बिजनेस के लिए 30 से 40 साल की उम्र के करीब 500 युवा लीडर्स की एक मजबूत फौज तैयार की है. इन सभी युवा लीडर्स को खास तौर पर ट्रेनिंग दी गई है ताकि कंपनी की तरक्की की रफ्तार और तेज हो सके.
धीरूभाई अंबानी के बाद हुए पारिवारिक विवाद से लिया सबक, इसलिए पहले से की तैयारी
रिलायंस ग्रुप में उत्तराधिकार की इस पूरी प्लानिंग को इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि खुद मुकेश अंबानी का शुरुआती सफर काफी मुश्किलों भरा रहा था. साल 2002 में रिलायंस के संस्थापक और मुकेश अंबानी के पिता धीरूभाई अंबानी का जब निधन हुआ था, तब उन्होंने कोई वसीयत नहीं छोड़ी थी. इसके बाद कंपनी के मालिकाना हक को लेकर मुकेश अंबानी और उनके छोटे भाई अनिल अंबानी के बीच एक लंबा और बड़ा पारिवारिक विवाद चला था. पुराने कड़वे अनुभवों से सबक लेते हुए मुकेश अंबानी ने बहुत पहले ही अपने बिजनेस के बंटवारे और उत्तराधिकार की योजना पर काम शुरू कर दिया था ताकि भविष्य में रिलायंस इकोसिस्टम का विकास बिना किसी रुकावट के चलता रहे.