रायपुर।
छत्तीसगढ़ की सभी 33 जेलों से आज रविवार को सेहत और सकारात्मकता से जुड़ी एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है. प्रदेश की सभी जेलों में 12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस बेहद उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया. केंद्रीय जेल रायपुर में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में जेल महानिदेशक यानी जेल डीजी हिमांशु गुप्ता मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए. उनके साथ जेल अधीक्षक योगेश सिंह क्षत्री और आर्ट ऑफ लिविंग संस्था के योग गुरु भी मौजूद रहे. इस मौके पर जेल के हजारों कैदियों और अधिकारियों ने एक साथ मिलकर सुबह-सुबह योगाभ्यास किया और समाज को स्वस्थ जीवन जीने का संदेश दिया.
कैदियों ने सीखे प्राणायाम के गुर, योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करने का लिया संकल्प
आर्ट ऑफ लिविंग के योग प्रशिक्षकों की देखरेख में जेल के बंदियों और वहां तैनात कर्मचारियों ने कई तरह के योगासन किए. इसके साथ ही उन्होंने प्राणायाम (Pranayama) का अभ्यास भी किया. प्राणायाम का सरल और आम भाषा में मतलब होता है अपनी सांसों पर नियंत्रण रखने की एक खास कसरत, जो हमारे फेफड़ों को मजबूत बनाती है और मानसिक तनाव को दूर करती है. सुबह के शांत माहौल में योग करने के बाद जेल के कैदियों में एक अलग ही उत्साह देखने को मिला. सभी बंदियों ने यह संकल्प लिया कि वे जेल के अंदर रहकर हर दिन योग करेंगे और इसे अपनी रोज की दिनचर्या का एक मुख्य हिस्सा बनाएंगे ताकि उनका स्वास्थ्य अच्छा रहे.
योग सिर्फ कसरत नहीं, मन और आत्मा को जोड़ने का माध्यम: जेल डीजी हिमांशु गुप्ता
इस खास मौके पर जेल डीजी हिमांशु गुप्ता ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की वजह से आज योग को पूरी दुनिया में एक बड़ी पहचान मिली है. आज पूरा विश्व भारत की इस प्राचीन पद्धति को अपना रहा है. उन्होंने कैदियों को समझाते हुए कहा कि योग केवल शरीर को हिलाने-डुलाने वाला कोई व्यायाम नहीं है, बल्कि यह हमारे शरीर, मन और आत्मा को आपस में जोड़ने का एक पवित्र माध्यम है. योग करने से इंसान के भीतर सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) का संचार होता है जो जेल में बंद कैदियों के व्यवहार को बदलने और उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाने में बहुत मददगार साबित होगा.