मुंबई/नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी घटनाक्रम देखने को मिल सकता है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) खेमे के 6 सांसदों के अलग होने की चर्चा अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। सूत्रों के मुताबिक, रविवार को बागी सांसद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने अगले कदम का औपचारिक ऐलान कर सकते हैं।
बताया जा रहा है कि ये सांसद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात और उन्हें सौंपे गए पत्र से जुड़े दस्तावेज भी सार्वजनिक करेंगे। इसके साथ ही वे उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले खेमे से दूरी बनाने के कारणों पर भी अपनी बात रख सकते हैं।
दिल्ली से शुरू हुआ सियासी घटनाक्रम
पिछले कुछ दिनों से महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज थी। इसी बीच संजय जाधव, संजय देशमुख, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश पाटिल अष्टिकर और संजय दीना पाटिल समेत छह सांसद अलग-अलग स्थानों से दिल्ली पहुंचे। इसके बाद वे नोएडा के एक होटल में रुके और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे तथा सांसद श्रीकांत शिंदे के साथ बैठक में शामिल हुए।
लोकसभा अध्यक्ष से की मुलाकात
जानकारी के अनुसार, अगले दिन सुबह श्रीकांत शिंदे और ओमराजे निंबालकर ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। इसके कुछ घंटे बाद बाकी सांसद भी स्पीकर से मिले। सांसदों ने एक पत्र सौंपकर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय की इच्छा जताई। साथ ही लोकसभा में बैठने की व्यवस्था बदलने का अनुरोध भी किया गया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी निगाहें
अब सभी की नजर रविवार को होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस पर है। बताया जा रहा है कि दो सांसद चेन्नई से, दो कोलकाता से और अन्य सांसद मुंबई व पुणे से कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस दौरान राजनीतिक स्थिति पर बड़ा बयान सामने आ सकता है।
महाराष्ट्र की राजनीति में इस संभावित टूट को उद्धव ठाकरे के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। यदि छह सांसदों का अलग गुट औपचारिक रूप से सामने आता है, तो राज्य की सियासत में इसके दूरगामी असर देखने को मिल सकते हैं।