सूरजपुर। छत्तीसगढ़ में हनी ट्रैप कोई नया शब्द नहीं है। पिछले डेढ़ दशक में प्रदेश ने ऐसे कई मामले देखे हैं, जिनमें दोस्ती, प्रेम, विवाह या सामाजिक संबंधों की आड़ लेकर कथित रूप से आर्थिक लाभ, ब्लैकमेलिंग और कानूनी दबाव बनाने के आरोप सामने आए। अब सरगुजा संभाग के सूरजपुर और अंबिकापुर में सामने आया एक नया विवाद फिर से उसी बहस को हवा दे रहा है कि कहीं कानून का भय और सामाजिक प्रतिष्ठा का दबाव कुछ लोगों के लिए कमाई का जरिया तो नहीं बनता जा रहा।
सूरजपुर जिले की एक महिला को लेकर इन दिनों दोनों जिलों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कुछ पीड़ित परिवारों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि महिला द्वारा युवकों से पहले दोस्ती की जाती है, फिर संबंधों में नजदीकी बढ़ने के बाद विवाद की स्थिति में गंभीर आपराधिक प्रकरण दर्ज करा दिए जाते हैं। इन आरोपों की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पीड़ित पक्ष लगातार निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि महिला के खिलाफ और उसके द्वारा दर्ज कराए गए मामलों का अध्ययन किया जाए तो कई मामलों में घटनाक्रम और आरोपों का स्वरूप एक जैसा दिखाई देता है। आरोप है कि विभिन्न समय में अलग-अलग व्यक्तियों के खिलाफ दुष्कर्म और अन्य धाराओं के तहत अपराध दर्ज कराए गए हैं। दूसरी ओर कुछ मामलों में स्वयं महिला के खिलाफ धोखाधड़ी के प्रकरण दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
स्थानीय स्तर पर सबसे अधिक चर्चा इस बात को लेकर है कि महिला द्वारा कथित रूप से अलग-अलग दस्तावेजों में पिता का नाम और पता बदलने का प्रयास किया गया। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इससे उसकी पूर्व पृष्ठभूमि और विभिन्न मामलों का रिकॉर्ड जोड़ने में कठिनाई होती है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि केवल आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकती है। पीड़ित परिवारों का कहना है कि यह मामला केवल व्यक्तिगत विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित पैटर्न की जांच की जरूरत है। उनका आरोप है कि कुछ मामलों में सामाजिक बदनामी के डर से लोग समझौता करने या आर्थिक दबाव झेलने को मजबूर हो जाते हैं। इसी कारण उन्होंने पुलिस महानिरीक्षक और जिला प्रशासन से विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित कर सभी पुराने और नए मामलों की संयुक्त जांच कराने की मांग की है।
दरअसल, छत्तीसगढ़ में हनी ट्रैप की चर्चा तब व्यापक हुई थी जब पिछले वर्षों में कई चर्चित मामलों में कारोबारी, ठेकेदार, अधिकारी और राजनीतिक प्रभाव वाले लोगों के नाम सामने आए थे। कई मामलों में आरोप लगे कि पहले दोस्ती या प्रेम संबंध बनाए गए और बाद में वीडियो, फोटो या कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर रकम वसूलने का प्रयास किया गया। कुछ मामलों में जांच एजेंसियों ने संगठित गिरोहों के अस्तित्व की भी जांच की थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में सबसे बड़ी चुनौती सत्य तक पहुंचना होता है। एक ओर वास्तविक महिला उत्पीड़न और यौन अपराध के पीड़ितों को न्याय दिलाना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर यदि किसी कानून का दुरुपयोग हो रहा हो तो उसकी निष्पक्ष जांच भी उतनी ही आवश्यक है। यही कारण है कि न्यायालय अक्सर ऐसे मामलों में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, कॉल रिकॉर्ड, बैंक लेन-देन, सोशल मीडिया चैट और अन्य तकनीकी प्रमाणों को महत्वपूर्ण मानते हैं।
सूरजपुर और अंबिकापुर में चर्चा का विषय बने इस प्रकरण ने फिर कानून, समाज और प्रशासन के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ताओं के आरोप सही हैं तो यह एक संगठित ब्लैकमेलिंग नेटवर्क का मामला हो सकता है, और यदि आरोप निराधार साबित होते हैं तो संबंधित व्यक्तियों की ओर से लगाए जा रहे दावे भी कठोर कानूनी जांच की कसौटी पर खरे नहीं उतरेंगे।
फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि जांच एजेंसियों द्वारा निष्पक्ष और व्यापक जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आरोपों के पीछे सच्चाई क्या है। सरगुजा संभाग में चर्चा का विषय बने इस विवाद ने फिर यह साबित कर दिया है कि हनी ट्रैप जैसे मामलों में केवल आरोप और प्रत्यारोप नहीं, बल्कि तथ्य, साक्ष्य और निष्पक्ष जांच ही अंतिम सत्य तक पहुंचने का रास्ता हैं।