इतिहास रच दिया! 20 साल के प्रज्ञानानंदा ने जीता नॉर्वे चेस 2026 का खिताब, विश्वनाथन आनंद भी नहीं कर पाए थे ये कमाल

स्पोर्ट्स डेस्क, ब्यूरो रिपोर्ट: भारत के 20 साल के युवा ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानानंदा (R Praggnanandhaa) ने पूरी दुनिया में देश का डंका बजा दिया है। चेन्नई के रहने वाले इस खिलाड़ी ने दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट्स में से एक नॉर्वे चेस 2026 (Norway Chess 2026) का खिताब अपने नाम कर लिया है। वे इस टूर्नामेंट को जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं।

आखिरी दौर के सांस रोक देने वाले मुकाबले में प्रज्ञानानंदा ने जर्मनी के विन्सेंट कीमर को क्लासिकल गेम में चटाई सुंघाई। इस जीत से उन्हें पूरे 3 अंक मिले और वे कुल 18 अंकों के साथ सीधे चैंपियन (Norway Chess 2026 Champion) बन गए।

तीसरे नंबर से सीधे पहुंचे टॉप पर, आनंद और गुकेश भी चूके

चेन्नई के इस जांबाज खिलाड़ी ने आखिरी राउंड की शुरुआत 15 अंकों के साथ तीसरे नंबर से की थी। किसी को उम्मीद नहीं थी कि वे अचानक बाजी पलट देंगे। लेकिन निर्णायक मैच में उन्होंने कमाल का खेल दिखाया और सबको पीछे छोड़ते हुए पहले पायदान पर कब्जा कर लिया।

इस जीत की अहमियत आप इस बात से समझ सकते हैं कि साल 2013 में शुरू हुए नॉर्वे चेस टूर्नामेंट को भारत के दिग्गज और 5 बार के वर्ल्ड चैंपियन विश्वनाथन आनंद (Viswanathan Anand) भी कभी नहीं जीत पाए। यही नहीं, मौजूदा विश्व चैंपियन डी. गुकेश (D Gukesh) भी इस बार इस रेस में पीछे रह गए।

नंबर-1 मैग्नस कार्लसन को दो बार चटाई धूल

प्रज्ञानानंदा दूसरी बार नॉर्वे चेस खेल रहे थे। शुरुआत थोड़ी धीमी रही, लेकिन दूसरे हाफ में उन्होंने ऐसी वापसी की कि विरोधी खिलाड़ी देखते रह गए।

इस पूरे टूर्नामेंट की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक बात यह रही कि प्रज्ञानानंदा ने दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी और 7 बार के नॉर्वे चेस विनर मैग्नस कार्लसन (Magnus Carlsen) को क्लासिकल शतरंज में एक नहीं, बल्कि दो-दो बार हराया। कैंडिडेट्स टूर्नामेंट (Candidates Tournament) की नाकामी को पीछे छोड़ते हुए प्रज्ञानानंदा ने यह जोरदार कमबैक किया है।

अमेरिका के वेस्ली सो का टूटा सपना

टूर्नामेंट के आखिरी दौर से ठीक पहले अमेरिका के ग्रैंडमास्टर वेस्ली सो (Wesley So) 15.5 अंकों के साथ सबसे आगे चल रहे थे। सब मान रहे थे कि खिताब वही जीतेंगे। लेकिन आखिरी मैच में फ्रांस के अलीरेजा फिरूजा ने उन्हें ड्रॉ पर रोक दिया। मैच आर्मागेडन टाईब्रेकर (Armageddon Tie-break) में खिंच गया और इसी का फायदा उठाकर प्रज्ञानानंदा ने बाजी मार ली।

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