लखनऊ। उत्तर प्रदेश में प्रीपेड स्मार्ट मीटर को लेकर मचे घमासान के बीच योगी सरकार अब पूरी तरह बैकफुट पर आ गई है। प्रदेश सरकार ने न सिर्फ विवादित प्रीपेड स्मार्ट मीटरों पर रोक लगाई है, बल्कि अब उपभोक्ताओं की जेब से “बेजा” वसूला गया पैसा भी वापस करने का फैसला किया है।
बिजली कंपनियों की मनमानी से परेशान उत्तर प्रदेश के करीब 5 लाख से अधिक उपभोक्ताओं के लिए यह राहत भरी खबर है। इसी महीने से उपभोक्ताओं को उनके हक का करीब 200 करोड़ रुपया वापस मिलना शुरू हो जाएगा।
सीधे बिल में होगा पैसा एडजस्ट
सरकार के फैसले के मुताबिक, यह रकम नकद नहीं दी जाएगी। इसकी जगह, उपभोक्ताओं के बिजली बिल में इस पैसे को समायोजित (Adjust) किया जाएगा। यानी अगले बिल में उतनी रकम कम होकर आएगी, जितनी उपभोक्ताओं से अतिरिक्त वसूली गई थी। विभाग ने इसके लिए तैयारी पूरी कर ली है।
ढाई गुना ज्यादा वसूले थे दाम
इस पूरे विवाद की जड़ मीटर की कीमत थी। दरअसल, यूपी सरकार और बिजली कंपनियों ने 2800 रुपये की कीमत वाले मीटर के लिए जनता से 6016 रुपये वसूल लिए थे। यह मूल कीमत से करीब ढाई गुना से भी ज्यादा था। आम जनता का साफ आरोप था कि प्रीपेड स्मार्ट मीटर के नाम पर बिजली कंपनियां उनकी जेब पर “डकैती” डाल रही हैं। मीटर लगने के बाद से ही लोगों ने शिकायत की थी कि उनके बैलेंस बहुत तेजी से कट रहे हैं और मीटर की कॉस्ट भी बहुत ज्यादा वसूली जा रही है।
चुनावी साल में जनता के गुस्से के आगे झुकी सरकार
पूरे प्रदेश में इस मुद्दे पर जोरदार विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। विपक्षी दलों ने भी इसे बड़ा मुद्दा बनाया था। सामने नगर निगम चुनाव और आने वाले अन्य राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए योगी सरकार ने जोखिम लेना उचित नहीं समझा। जनता के भारी गुस्से को देखते हुए सरकार ने पहले तो इन मीटरों को लगाने पर रोक लगाई और अब पैसा वापस करने का आदेश जारी कर दिया है।