आगरा। उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में अब बड़े बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। सूबे के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने साफ कर दिया है कि अब स्कूलों में केवल डिग्री बांटने वाली पढ़ाई नहीं होगी, बल्कि बच्चों को संस्कारों से भी जोड़ा जाएगा। आगरा में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मंत्री ने पश्चिमी संस्कृति वाली कविताओं और शिक्षा पद्धति पर जमकर निशाना साधा।
“बारिश को भगाने वाली कविताएं क्यों पढ़ें हमारे बच्चे?”
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बचपन से पढ़ाई जाने वाली मशहूर अंग्रेजी कविता “रेन-रेन गो अवे” (Rain Rain Go Away) का कड़ा विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहाँ हम बारिश के लिए इंद्र देव की पूजा करते हैं और प्रार्थना करते हैं कि अच्छी वर्षा हो।
मंत्री ने कहा, “एक तरफ हमारा किसान बारिश की राह ताकता है, वहीं दूसरी तरफ हम अपने बच्चों को सिखा रहे हैं कि ‘बारिश तुम चली जाओ’। यह हमारी संस्कृति और जरूरत के बिल्कुल उलट है। ऐसी शिक्षा बच्चों को अपनी जड़ों से काटती है।”
संस्कार और शिक्षा का मेल जरूरी
योगेंद्र उपाध्याय ने इस बात पर जोर दिया कि नई शिक्षा नीति के तहत अब ‘संस्कार युक्त शिक्षा’ पर ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा का मूल मंत्र ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ होना चाहिए। यानी शिक्षा ऐसी हो जो सबका भला करे और समाज में सुख लाए। मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुसार, हम ऐसी पीढ़ी तैयार करना चाहते हैं जो आधुनिक तो हो, लेकिन अपने संस्कारों को न भूले।
केंद्र सरकार को लिखेंगे पत्र
शिक्षा व्यवस्था में इन बदलावों को लागू करने के लिए मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बड़ा कदम उठाने की बात कही है। उन्होंने बताया कि वे जल्द ही केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री (शिक्षा मंत्री) को एक पत्र लिखेंगे। इस पत्र में वे प्राथमिक और उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम में भारतीय मूल्यों