शोरूम वालों की मनमानी पर साय सरकार का हथौड़ा: अब गाड़ी खरीदते समय इंश्योरेंस और एक्सेसरीज के लिए मजबूर नहीं कर पाएंगे डीलर

छत्तीसगढ़ के वाहन खरीदारों को बड़ी राहत देते हुए परिवहन विभाग ने शोरूम संचालकों की तानाशाही पर पूरी तरह रोक लगा दी है। अब नए वाहन की खरीदी के दौरान कोई भी डीलर ग्राहकों पर अपने ही शोरूम से बीमा या अतिरिक्त एक्सेसरीज खरीदने के लिए अनावश्यक दबाव नहीं डाल पाएगा। मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंची एक गंभीर शिकायत के बाद विभाग ने प्रदेश के सभी पंजीयन पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं कि यदि किसी डीलर द्वारा ग्राहक की पसंद में दखल दिया गया या उसे बाध्य किया गया तो संबंधित विक्रेता के खिलाफ केंद्रीय मोटरयान नियम 1989 के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। शासन ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा मानकों के अलावा किसी भी अन्य सजावटी सामान या बीमा उत्पाद को थोपना पूरी तरह अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

ग्राहक ही होगा असली राजा: बीमा और एक्सेसरीज के चयन पर मिली पूरी आजादी

सरकार के नए आदेश के अनुसार वाहन खरीदार अब यह तय करने के लिए स्वतंत्र हैं कि वे अपने वाहन का बीमा शोरूम से कराएंगे या अपनी पसंद की किसी अन्य एजेंसी से। परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि मोटर वाहन अधिनियम में पंजीकरण के लिए केवल सुरक्षा मानकों की अनिवार्यता है और संगीत प्रणाली, सीट कवर या अन्य एक्सेसरीज खरीदना पूरी तरह से ग्राहक के विवेक पर निर्भर करता है। डीलर अब यह बहाना नहीं बना पाएंगे कि बिना एक्सेसरीज किट के गाड़ी की डिलीवरी या पंजीयन नहीं होगा क्योंकि भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के तहत किसी भी बीमा उत्पाद को वाहन बिक्री के साथ अनिवार्य रूप से जोड़ना कानूनन गलत है।

शिकायत मिली तो रद्द होगा लाइसेंस: परिवहन विभाग का सख्त अल्टीमेटम

रायपुर के एक दवा व्यापारी द्वारा मुख्यमंत्री से की गई शिकायत ने इस बड़े सुधार की नींव रखी है जिसके बाद अब पूरे प्रदेश के डीलरों पर शिकंजा कस दिया गया है। विभाग ने चेतावनी दी है कि शोरूम संचालक पंजीयन प्रक्रिया में बाधा डालकर ग्राहकों को ब्लैकमेल नहीं कर सकते और यदि ऐसी कोई भी गतिविधि पाई गई तो मोटरयान नियमों की धारा 34 से 44 के प्रावधानों के अंतर्गत डीलरशिप पर कड़ी कार्रवाई होगी। सभी पंजीयन अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्र के अधिकृत विक्रेताओं की गतिविधियों की सतत निगरानी करें और सुनिश्चित करें कि स्थानीय बाजार से सामान खरीदने या बीमा कराने वाले ग्राहकों को किसी प्रकार की प्रताड़ना का सामना न करना पड़े।

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