नई दिल्ली। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर अपने बेबाक बयानों और सटीक कूटनीति के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं। फिनलैंड दौरे पर गए विदेश मंत्री जयशंकर ने वहां आयोजित एक बड़े वैश्विक मंच कुलतारंता टॉक्स (Kultaranta Talks) में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने फिनलैंड की विदेश मंत्री एलिना वाल्टोनेन के सामने पश्चिमी देशों के दोहरे रवैये पर जमकर क्लास लगाई। लेकिन इसी गंभीर बातचीत के बीच जयशंकर की हाजिरजवाबी पर फिनलैंड की विदेश मंत्री का एक मजेदार रिएक्शन कैमरे में कैद हो गया, जो अब सोशल मीडिया पर खूब देखा जा रही है।
समझौतों को लेकर जयशंकर का मजेदार जवाब
दोनों देशों के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता यानी आपसी संबंधों को मजबूत करने वाली खास बैठक के बाद दोनों नेता मीडिया से मुखातिब हुए थे। इस दौरान फिनलैंड की विदेश मंत्री एलिना वाल्टोनेन ने मुस्कुराते हुए कहा कि दोनों देशों ने कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इस बात पर विदेश मंत्री जयशंकर ने तपाक से मजाकिया लहजे में कहा कि आपको सार्वजनिक तौर पर यह बात नहीं कहनी चाहिए थी। जयशंकर का यह जवाब सुनते ही एलिना पहले तो थोड़ा चौंक गईं और फिर अपनी हंसी नहीं रोक पाईं। दोनों नेताओं के बीच का यह हल्का-फुल्का पल सोशल मीडिया पर काफी पसंद किया जा रहा है।
रूस से तेल खरीदने पर फिनलैंड ने किया भारत का समर्थन
विदेश मंत्री एस. जयशंकर का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब पूरी दुनिया युद्ध, ऊर्जा सुरक्षा और बदलती वैश्विक परिस्थितियों से जूझ रही है। इस बैठक में सबसे बड़ी बात रूस और यूक्रेन युद्ध को लेकर हुई। पश्चिमी देश लंबे समय से भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल की खरीद पर सवाल उठाते रहे हैं। लेकिन इस मंच पर फिनलैंड की विदेश मंत्री ने सार्वजनिक रूप से भारत के रुख का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने साफ कहा कि भारत ने रूस से तेल खरीदते समय पश्चिमी देशों द्वारा तय की गई प्राइस कैप व्यवस्था यानी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तय की गई कीमत सीमा के नियमों का पूरी तरह पालन किया है।
इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर बनी दोनों देशों में सहमति
इस दौरे के दौरान भारत और फिनलैंड के बीच व्यापार, निवेश, ग्रीन एनर्जी यानी पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा और डिजिटल तकनीकों को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। फिनलैंड की सरकार भारत के साथ आर्थिक और तकनीकी साझेदारी बढ़ाने के लिए बेहद उत्सुक नजर आई। वहीं भारत ने भी यूरोप के देशों के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। दोनों नेताओं ने रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, नई तकनीकों के आदान-प्रदान और वैश्विक सुरक्षा को लेकर एक साथ मिलकर काम करने पर सहमति जताई है।