रायपुर। भारतीय संस्कृति के शाश्वत मंत्र “सर्वे सन्तु निरामया” को ध्येय वाक्य मानकर छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार ने बस्तर संभाग में स्वास्थ्य सेवाओं की नई इबारत लिख दी है। कभी लाल आतंक और सुविधाओं के अभाव के लिए पहचाना जाने वाला बस्तर आज विकास और बेहतर चिकित्सा सुविधाओं की नई कहानी कह रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के संकल्प ने सुदूर वनांचल के गांवों में रहने वाले लाखों बस्तरिया लोगों के जीवन में आशा की नई किरण जगाई है। अब बस्तर के अंतिम व्यक्ति तक न केवल बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंच रही हैं, बल्कि वे पूरी तरह निःशुल्क और सुलभ भी हैं।
मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान: अस्पताल अब जनता के द्वार पर
बस्तर के सात जिलों में “मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान” परिवर्तन की सबसे बड़ी आधारशिला बनकर उभरा है। इस अभियान ने स्वास्थ्य सेवाओं को “अस्पताल केंद्रित” से बदलकर “जन-केंद्रित” कर दिया है। इसके तहत मेडिकल टीमें गांव-गांव और टोला-पारा तक पहुंचकर घर-घर सर्वे कर रही हैं। अभियान की सबसे बड़ी खूबी प्रत्येक नागरिक का डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार करना है, जिससे बीमारियों की पहचान शुरुआती स्तर पर ही संभव हो पा रही है। इस सक्रिय पहल से गंभीर बीमारियों के खतरे को वक्त रहते टालकर लोगों को नया जीवनदान मिल रहा है।
अटल आरोग्य लैब और डिजिटल सिस्टम: हाईटेक जांच से बदली तस्वीर
सुकमा से शुरू हुई “अटल आरोग्य लैब” की पहल अब पूरे बस्तर संभाग में आधुनिक जांच की नई पहचान बन चुकी है। इन लैब्स में 133 प्रकार की पैथोलॉजी जांचें पूरी तरह मुफ्त की जा रही हैं, जिसका विस्तार 1,046 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों तक हो चुका है। डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करते हुए अब जांच रिपोर्ट सीधे मरीजों के व्हाट्सएप और एसएमएस पर भेजी जा रही है, जिससे उन्हें बार-बार अस्पताल के चक्कर नहीं काटने पड़ते। बीजापुर के भीमा मंडावी और गीदम की सोमारी कश्यप जैसे हजारों हितग्राही इस चुस्त व्यवस्था और त्वरित उपचार से लाभान्वित होकर आज सामान्य और स्वस्थ जीवन जी रहे हैं।