कोल इंडिया का बड़ा फैसला: लागत बढ़ने के बावजूद नहीं बढ़ेंगे कोयले के दाम

नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर डीजल, पेट्रोल और गैस की कीमतों में उछाल देखा जा रहा है। कई निजी व सरकारी कंपनियों ने अपने उत्पादों के दाम बढ़ा दिए हैं, लेकिन देश की सबसे बड़ी सरकारी कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड ने इसके विपरीत एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि परिचालन लागत में हुई भारी वृद्धि का भार ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा।

परिचालन लागत में हुई वृद्धि का विवरण

कोल इंडिया ने शेयर बाजार को सूचित किया कि कोयला खनन में उपयोग होने वाले विस्फोटकों और औद्योगिक डीजल की कीमतों में उल्लेखनीय तेजी आई है। कंपनी अपनी सहायक इकाइयों के साथ मिलकर प्रतिवर्ष लगभग 9 लाख टन विस्फोटकों की खपत करती है। अमोनियम नाइट्रेट की कीमतों में वृद्धि के कारण विस्फोटकों की औसत लागत, जो फरवरी 2026 में 39,588 रुपये प्रति टन थी, मार्च के अंत तक 26 प्रतिशत बढ़कर 49,783 रुपये प्रति टन हो गई है।

अमोनियम नाइट्रेट की कीमतों में उछाल

विस्फोटक निर्माण में अमोनियम नाइट्रेट की हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत होती है। संघर्ष की स्थिति से पहले इसकी कीमत 50,500 रुपये प्रति टन थी, जो 1 अप्रैल 2026 तक 44 प्रतिशत बढ़कर 72,750 रुपये प्रति टन तक पहुंच गई है। पश्चिमी एशिया में संकट गहराने से पहले अगस्त 2025 से जनवरी 2026 तक कीमतें स्थिर थीं, परंतु मार्च 2026 के बाद से इसमें निरंतर बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।

उपभोक्ताओं के हित में लिया फैसला

घरेलू कोयला उत्पादन में 80 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी रखने वाली कोल इंडिया ने कहा है कि यदि इस लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डाला जाता, तो बाजार की कीमतों पर इसका व्यापक नकारात्मक असर पड़ता। देश को किफायती दरों पर ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कंपनी इस अतिरिक्त वित्तीय भार को खुद वहन कर रही है। इसके अतिरिक्त, कोल इंडिया अपनी खदानों में कार्यरत उन ठेकेदारों को भी बढ़ी हुई डीजल कीमतों की क्षतिपूर्ति प्रदान कर रही है जो थोक में ईंधन की खरीदारी करते हैं। इस पहल से आने वाले समय में देश में बिजली और अन्य औद्योगिक उत्पादन की लागत को स्थिर रखने में मदद मिलेगी।

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