रायपुर: भीषण गर्मी के मौसम में मटके का पानी पीना स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है। यह प्राकृतिक रूप से ठंडा और मीठा होने के साथ-साथ शरीर के तापमान को संतुलित रखने में मदद करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, फ्रिज के अत्यधिक ठंडे पानी की तुलना में मटके का पानी पाचन और गले के लिए अधिक सुरक्षित है। हालांकि, यदि मटके की साफ-सफाई का उचित ध्यान न रखा जाए, तो इसमें बैक्टीरिया पनप सकते हैं जो पानी को दूषित कर स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
मटके की सही देखभाल और शुद्धता बनाए रखने के लिए विशेषज्ञों ने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। सबसे अनिवार्य नियम यह है कि मटके का पानी प्रतिदिन बदला जाना चाहिए। लंबे समय तक एक ही पानी जमा रहने से उसमें सूक्ष्म गंदगी और कीटाणु पनपने का खतरा रहता है। इसके अलावा, सप्ताह में कम से कम दो से तीन बार मटके की आंतरिक रूप से अच्छी सफाई की जानी चाहिए। सफाई के लिए किसी भी रासायनिक साबुन के बजाय नरम ब्रश या साफ कपड़े का उपयोग करना उचित होता है।
प्राकृतिक तरीके से मटके को कीटाणुरहित करने के लिए नींबू और नमक का मिश्रण एक बेहतरीन विकल्प है। यह न केवल मटके की गंदगी को हटाता है बल्कि किसी भी तरह की दुर्गंध को भी दूर करता है। सफाई के बाद मटके को कुछ समय के लिए धूप में सुखाना चाहिए, ताकि नमी पूरी तरह खत्म हो जाए। इसके साथ ही मटके को हमेशा ढक्कन से ढंककर रखना चाहिए और उसके आसपास के स्थान को भी साफ-सुथरा रखना आवश्यक है। मटके में हमेशा फिल्टर किया हुआ या साफ पानी ही भरना चाहिए ताकि मिट्टी के प्राकृतिक छिद्र लंबे समय तक खुले रहें और पानी ठंडा बना रहे।