बिलासपुर। नाबालिग को बहला-फुसलाकर भगाने और उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में अदालत ने कड़ा फैसला सुनाया है। विशेष अपर सत्र न्यायाधीश (प्रथम एफटीसी पॉक्सो) पूजा जायसवाल की अदालत ने आरोपी जयकुमार लहरे उर्फ कलुआ को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही न्यायालय ने पीड़िता को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि देने का भी आदेश दिया है।
प्रकरण की सुनवाई के दौरान न्यायाधीश पूजा जायसवाल ने गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं पीड़ित बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास पर आजीवन प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं। अदालत ने माना कि घटना के समय पीड़िता की आयु 18 वर्ष से कम थी और आरोपी का कृत्य समाज में बच्चों के प्रति घृणित प्रभाव छोड़ता है। अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक मनीषा नंदी ने प्रभावी पैरवी की, जिसके बाद अदालत ने गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर यह फैसला सुनाया।
मामले के अनुसार, तखतपुर थाना क्षेत्र निवासी पीड़िता के पिता ने नवंबर 2024 में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनकी नाबालिग पुत्री बिना बताए कहीं चली गई है। खोजबीन के दौरान पता चला कि कोई अज्ञात व्यक्ति उसे बहला-फुसलाकर ले गया है। पुलिस विवेचना में सामने आया कि आरोपी जयकुमार लहरे पीड़िता को उत्तर प्रदेश के एक ईंट भट्टे पर ले गया था।
पुलिस टीम ने उत्तर प्रदेश दबिश देकर नाबालिग को बरामद किया और आरोपी को गिरफ्तार किया। विवेचना पूरी होने के बाद मामला महिला थाने को प्रेषित किया गया और चालान न्यायालय में पेश किया गया। सभी पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने आरोपी को कड़ी सजा से दंडित किया है।