पहली बार युद्ध में कमर्शियल डेटा सेंटर पर ड्रोन हमला, ईरान ने अमेरिकी कंपनियों को दी धमकी

तेहरान। ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में अमेजन वेब सर्विसेज (एडब्ल्यूएस) के दो डेटा सेंटरों पर ड्रोन से हमला किया। साथ ही बहरीन में एक तीसरा वाणिज्यिक डेटा सेंटर भी इस हमले में प्रभावित हुआ, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि उसे जानबूझकर निशाना बनाया गया था या नहीं। ईरान ने संकेत दिया है कि अब वह वाणिज्यिक डेटा सेंटरों को भी सैन्य लक्ष्य मानता है।

यह पहला अवसर है जब किसी देश ने युद्ध के दौरान जानबूझकर वाणिज्यिक डेटा सेंटरों पर हमला किया है। पूर्व में डेटा सेंटर जासूसी और साइबर हमलों के निशाने बनते रहे हैं, लेकिन इस बार हमला सीधे ड्रोन से किया गया, जिससे भौतिक संरचनाओं को क्षति पहुंची।

ईरान ने 18 टेक कंपनियों को दी थी धमकी

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने इससे पूर्व अरब देशों में स्थित अमेरिका की 18 टेक कंपनियों को धमकी दी थी। ईरान ने कहा था कि ये कंपनियां ईरान-अमेरिका युद्ध में शामिल हैं। आईआरजीसी ने स्पष्ट किया था कि इन कंपनियों के कर्मचारी कार्यालय से दूर रहें, क्योंकि एक निर्धारित समय पर हमला किया जाएगा।

जिन अमेरिकी कंपनियों को धमकी दी गई, उनमें माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, एप्पल, इंटेल, आईबीएम, टेस्ला और बोइंग जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल हैं। आईआरजीसी ने बयान में कहा कि ईरान में होने वाले किसी भी आतंकी हमले के जवाब में वे चुनिंदा कंपनियों और उनकी इकाइयों को पूरी तरह नष्ट कर देंगे। उन्होंने इन कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों को सुरक्षा की दृष्टि से तुरंत कार्यस्थल खाली करने की सलाह दी थी।

एआई के युग में डेटा सेंटर की बढ़ी अहमियत

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते उपयोग से डेटा सेंटरों की महत्ता काफी बढ़ गई है। विशेषकर अमेरिकी सेना एआई का उपयोग अपने संचालन और निर्णयन प्रक्रियाओं में कर रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि ईरान उन बुनियादी ढांचों को निशाना बना रहा है, जिन्हें वह अपने विरुद्ध होने वाली कार्रवाइयों से जुड़ा मानता है।

हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि जिन डेटा सेंटरों पर हमला हुआ, उनका सीधा उपयोग अमेरिकी सेना कर रही थी या नहीं। यह भी संभावना है कि ईरान ने यूएई को अमेरिका के साथ उसके संबंधों के कारण निशाना बनाया हो।

डेटा सेंटर और क्लाउड की अहमियत

आज के समय में डेटा सेंटर क्लाउड कंप्यूटिंग की वास्तविक आधारशिला हैं। मनोरंजन, बैंकिंग और सरकारी सेवाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों का संचालन इन्हीं डेटा सेंटरों पर निर्भर करता है। एआई के दौर में ये न केवल इंटरनेट को संचालित करते हैं, बल्कि एआई प्रणालियों को भी सहायता प्रदान करते हैं। यूएई में हुए हमले से वहां के बैंकिंग तंत्र पर भी प्रभाव पड़ा, जो इनकी संवेदनशीलता को रेखांकित करता है।

अमेरिका और सहयोगी देशों पर संभावित प्रभाव

रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका प्रायः अपना संवेदनशील डेटा अपने देश या रक्षा प्रतिष्ठानों में ही रखता है। बावजूद इसके, ईरान की सेना ने दावा किया कि ये हमले दुश्मन की सैन्य और खुफिया गतिविधियों को समर्थन देने वाले डेटा सेंटरों पर किए गए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला केवल सैन्य कारणों से नहीं, बल्कि यूएई और अमेरिका के बीच बढ़ते तकनीकी सहयोग को चेतावनी देने के उद्देश्य से भी किया गया हो सकता है।

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