नई दिल्ली। आयकर विभाग ने निवेशकों को बड़ी राहत देते हुए एक अप्रैल, 2017 से पहले किए गए निवेशों के हस्तांतरण से होने वाली आय को ‘सामान्य कर बचाव-रोधी नियम’ (जीएएआर) के दायरे से बाहर कर दिया है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने आयकर नियम, 2026 में संशोधन कर स्पष्ट किया है कि पुराने निवेशों पर पिछली तारीख से कर के कड़े नियम लागू नहीं होंगे।
इस संशोधन के माध्यम से सरकार ने उद्योग जगत की उस चिंता का समाधान कर दिया है, जिसमें निवेशकों को पिछली तारीख से टैक्स लागू होने का डर था। आयकर विशेषज्ञों के अनुसार, नियम 128 में किया गया यह बदलाव कर व्यवस्था में स्पष्टता लाएगा और जीएएआर तथा ‘ग्रैंडफादरिंग’ प्रावधानों के बीच के भ्रम को दूर करेगा। ग्रैंडफादरिंग एक ऐसा प्रावधान है जो नए नियमों के आने पर पुराने निवेशों या स्थितियों को पुराने नियमों के तहत ही सुरक्षित रखता है।
उल्लेखनीय है कि जीएएआर नियमों का मुख्य उद्देश्य विदेशी निवेशकों द्वारा की जाने वाली कर चोरी पर अंकुश लगाना है। इसे पहली बार वित्त वर्ष 2012-13 के बजट में प्रस्तावित किया गया था, लेकिन विवादों और निवेशकों की आशंकाओं के कारण इसे अंततः एक अप्रैल, 2017 से लागू किया गया।
सीबीडीटी के इस नए स्पष्टीकरण से अब यह सुनिश्चित हो गया है कि एक अप्रैल, 2017 के पहले के निवेशों के ट्रांसफर से मिलने वाली आय पर अधिकारियों द्वारा अनावश्यक जांच नहीं की जाएगी। यह कदम कर प्रणाली में निश्चितता लाने और निवेश के माहौल को और अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
