नई दिल्ली। अमेरिकी कांग्रेस की स्वतंत्र शोध शाखा ‘कांग्रेसशनल रिसर्च सर्विस’ (सीआरएस) द्वारा जारी एक हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूहों को खत्म करने के तमाम प्रयास विफल रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित कई संगठन अभी भी पाकिस्तानी जमीन का इस्तेमाल कर अपनी गतिविधियां संचालित कर रहे हैं। इन समूहों को मुख्य रूप से पांच श्रेणियों में बांटा गया है, जिनमें वैश्विक, अफगानिस्तान-केंद्रित, भारत-केंद्रित, घरेलू और सांप्रदायिक संगठन शामिल हैं।
सीआरएस की रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि पाकिस्तान में सक्रिय 15 प्रमुख आतंकी समूहों में से 12 को अमेरिकी कानून के तहत विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया जा चुका है। इनमें से अधिकांश समूह कट्टरपंथी इस्लामी विचारधारा से प्रेरित हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 2008 के मुंबई हमलों के लिए जिम्मेदार लश्कर-ए-तैयबा और 2001 में भारतीय संसद पर हमले से जुड़ा जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठन अभी भी सक्रिय हैं और कश्मीर की स्थिति को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता वापसी के बाद पाकिस्तान में उग्रवाद फिर से उभरा है। वर्तमान में पाकिस्तान खुद भी आतंकवाद से बुरी तरह प्रभावित है। वैश्विक स्तर पर सक्रिय अल-कायदा के अलावा, इस्लामिक स्टेट-खोरासान प्रांत और हक्कानी नेटवर्क जैसे संगठन भी सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय हैं। वहीं, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) को देश का सबसे खतरनाक समूह बताया गया है, जिसका उद्देश्य पाकिस्तानी सरकार को उखाड़ फेंककर शरिया कानून लागू करना है।