Raipur CGST Raid: फर्जी बिलों से करोड़ों का टैक्स घोटाला, सेंट्रल जीएसटी ने एमपी के बड़े कारोबारी को रायपुर में किया गिरफ्तार

रायपुर (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सेंट्रल जीएसटी की टीम ने टैक्स चोरी के खिलाफ एक और बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है। CGST विभाग की टीम ने फर्जी बिलिंग और टैक्स जालसाजी के हाईप्रोफाइल मामले में पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के बड़े कारोबारी जयदीप सिंह चंदेल को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई से कारोबारी जगत में हड़कंप मच गया है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया गया। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में जेल भेज दिया है।

बिना माल खरीदे हड़प लिए 17 करोड़ रुपये

यह पूरा मामला मेरिडियन स्टील्स एंड इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड (Meridian Steels and Infra Private Limited) और उसके कर्ता-धर्ता जयदीप सिंह चंदेल से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसी (Central GST Investigation Raipur) के अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी कारोबारी ने फर्जी बिलों (Fake Invoices) के जरिए करोड़ों रुपये का अवैध इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC हड़प लिया। विभाग को खुफिया जानकारी मिली थी कि यह कंपनी असल में किसी माल की खरीद-बिक्री नहीं कर रही थी। इसके बावजूद सिर्फ कागजों पर फर्जी कंपनियां दिखाकर टैक्स का लाभ उठाया जा रहा था। इस शिकायत के बाद पिछले साल 28 नवंबर को कंपनी के ठिकानों पर छापेमारी (CGST Raid Raipur) कर अहम दस्तावेज जब्त किए गए थे।

कागजों में चल रही थीं बंद हो चुकीं फर्में

जीएसटी विभाग के दावों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान इस कंपनी ने उन फर्मों के नाम पर 15.14 करोड़ रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट (Input Tax Credit Fraud) क्लेम किया जिनका असल में कोई वजूद ही नहीं था। इसके साथ ही जीएसटी रिटर्न (GST Return Scam) की गहराई से स्क्रूटनी करने पर 1.98 करोड़ रुपये के अतिरिक्त टैक्स का घपला भी पकड़ा गया। इस तरह कुल मिलाकर 17.13 करोड़ रुपये से ज्यादा के फर्जीवाड़े का आरोप है। हैरान करने वाली बात यह है कि जिन कंपनियों के बिल लगाए गए, उनमें से कई का जीएसटी रजिस्ट्रेशन (GST Registration) विभाग बहुत पहले ही निरस्त कर चुका था।

बड़ा नेटवर्क आने वाला है सामने

जांच के दौरान जब आरोपी जयदीप सिंह चंदेल (Jaideep Singh Chandel Arrest) का बयान दर्ज किया गया, तो उसने अपनी गलती मानते हुए डीआरसी-03 फॉर्म के तहत 19.98 लाख रुपये सरकारी खजाने में जमा कराए हैं। हालांकि, सीजीजीएसटी के अधिकारियों का कहना है कि यह एक संगठित टैक्स चोरी (Tax Evasion Case Chhattisgarh) का मामला है। फिलहाल इस रैकेट से जुड़े पूरे नेटवर्क को खंगाला जा रहा है। अधिकारियों को शक है कि इस खेल में रायपुर और मध्य प्रदेश के कुछ और बड़े नाम भी शामिल हो सकते हैं, जिन पर जल्द ही गाज गिर सकती है।

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