देशभर में कारगिल युद्ध के उन अमर वीरों को याद किया जा रहा है जिन्होंने देश के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी थी। इन वीर सपूतों में जम्मू के रहने वाले एक जवान भी शामिल हैं, जिन्होंने युद्ध के दौरान दुश्मनों से लोहा लेते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। इस घटना को बीते हुए काफी साल हो चुके हैं, लेकिन उनके परिवार के दिल में उनकी यादें आज भी वैसी ही जिंदा हैं।
यह जवान भारतीय सेना की एक विशेष रेजिमेंट का हिस्सा थे। वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान उन्हें सबसे कठिन माने जाने वाले मोर्चे पर भेजा गया था। अंधेरे और बर्फीले पहाड़ों के बीच जवानों ने जब आगे बढ़ना शुरू किया, तो दुश्मनों की तरफ से भारी गोलीबारी शुरू हो गई। इस भीषण मुकाबले के दौरान वे गंभीर रूप से घायल हो गए और देश की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।
मां ने बनवाया मंदिर और संभाल कर रखी आखिरी निशानी
शहीद जवान की मां आज भी अपने बेटे की शहादत को गर्व और आंसुओं के साथ याद करती हैं। उन्होंने अपने इकलौते बेटे की याद में घर के पास ही एक मंदिर का निर्माण करवाया है, जहां वे रोज पूजा करती हैं और तिरंगे के पास दीया जलाती हैं। उनके पास आज भी बेटे का वह बटुआ सुरक्षित रखा है जो युद्ध के दौरान गोलियों से छलनी हो गया था।

परिवार का कहना है कि इतने साल बीत जाने के बाद भी बेटे को खोने का दर्द कम नहीं हुआ है, लेकिन इस बात का बहुत गर्व है कि उसने देश के मान-सम्मान के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। ऐसे बलिदान देश की आने वाली पीढ़ियों को हमेशा आगे बढ़ने और देश के प्रति वफादार रहने की प्रेरणा देते रहेंगे।