विदेश यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए एक जरूरी चेतावनी सामने आई है। सरकार ने उन फर्जी वेबसाइट्स के खिलाफ सख्त कदम उठाया है जो असली पोर्टल होने का दावा करती हैं। ये नकली वेबसाइट्स यात्रियों को अपने जाल में फंसाकर पैसे वसूल रही हैं। मंत्रालय की तरफ से साफ कहा गया है कि इस तरह की सेवाओं के लिए किसी भी तरह का शुल्क नहीं लिया जाता है।
क्या है असली और नकली का फर्क
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की निजी जानकारी देने या पैसे चुकाने से पहले वेबसाइट के पते की अच्छी तरह जांच कर लें। जो पोर्टल सरकार द्वारा चलाया जाता है, उस पर यह सेवा पूरी तरह मुफ्त है। इसके बावजूद कुछ ठग लोगों को बेवकूफ बनाकर उनसे भुगतान करवा रहे हैं।

क्यों शुरू की गई थी यह खास सुविधा
इस डिजिटल पोर्टल की शुरुआत यात्रियों की सुविधा और स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखकर की गई थी। दूसरे देशों में फैल रही खतरनाक बीमारियों के खतरे को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर निगरानी बढ़ाई गई है। इसी के तहत यात्रियों के लिए अपनी यात्रा और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी पहले ही ऑनलाइन दर्ज कराना अनिवार्य कर दिया गया है।
जो लोग विदेश से भारत आ रहे हैं, उन्हें यात्रा शुरू करने से पहले तय समय के भीतर अपना यह फॉर्म ऑनलाइन जमा करना होता है। स्वास्थ्य संबंधी खतरों से निपटने के लिए यह कदम उठाया गया है ताकि किसी भी तरह के संक्रमण को देश में फैलने से रोका जा सके। अधिकारियों का कहना है कि यात्री किसी भी ठगी से बचने के लिए केवल सरकारी और आधिकारिक पोर्टल का ही इस्तेमाल करें और किसी भी अनजान लिंक पर पैसे न दें।