खाली पड़े औद्योगिक प्लॉट वापस लेगी सरकार, 800 को छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम ने भेजा नोटिस रायपुर। छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास के लिए आवंटित जमीनों के दुरुपयोग पर अब सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। उद्योग स्थापित करने के नाम पर लीज पर जमीन लेने के बाद वर्षों तक उसे खाली छोड़ देने वाले करीब 800 उद्यमियों को छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम (सीएसआईडीसी) ने नोटिस जारी किया है। इन उद्यमियों से 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है।
संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उनकी लीज रद्द कर जमीन वापस लेने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। राज्य के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों, विशेष रूप से रायपुर, उरला, सिलतरा और अन्य औद्योगिक केंद्रों में बड़ी संख्या में भूखंड वर्षों पहले उद्योग स्थापना के लिए आवंटित किए गए थे। नियमानुसार जमीन मिलने के दो वर्षों के भीतर उत्पादन इकाई शुरू करना अनिवार्य है, लेकिन अनेक मामलों में न तो उद्योग स्थापित हुए और न ही उत्पादन गतिविधियां शुरू हो सकीं।
इसका परिणाम यह हुआ कि औद्योगिक क्षेत्रों की बड़ी मात्रा में जमीन निष्क्रिय पड़ी रही, जबकि नए निवेशकों को भूमि उपलब्ध कराने में कठिनाइयां सामने आने लगीं। सीएसआईडीसी अधिकारियों के अनुसार ऐसे उद्यमियों को लगातार नोटिस भेजे जा रहे हैं और उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जा रहा है। यदि वे उद्योग स्थापना की ठोस कार्ययोजना प्रस्तुत नहीं कर पाए तो नियमों के तहत उनकी लीज समाप्त कर दी जाएगी। निगम ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल जमीन लेकर उसे लंबे समय तक खाली छोड़ देना स्वीकार्य नहीं होगा।
सरकार की कार्रवाई केवल नोटिस तक सीमित नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक करीब 250 भूखंडों को वापस लेने की प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा चुकी है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि औद्योगिक भूमि का उपयोग वास्तविक निवेश, उत्पादन और रोजगार सृजन के लिए हो, न कि केवल भूमि कब्जे या भविष्य के लाभ की उम्मीद में उसे खाली छोड़ दिया जाए। यह कार्रवाई ऐसे समय में हो रही है जब राज्य सरकार निवेश आकर्षित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
वर्ष 2024 से अब तक आठ लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों पर सहमति बन चुकी है और कई बड़े समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। हालांकि निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारना अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास, पर्यावरणीय स्वीकृतियां, बुनियादी ढांचे की उपलब्धता और कुशल मानव संसाधन की कमी जैसी समस्याओं के कारण कई परियोजनाएं अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।
यही वजह है कि बड़े निवेश घोषणाओं के बावजूद अनेक परियोजनाएं अभी प्रारंभिक चरण में ही अटकी हुई हैं। राज्य में ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी, डेटा सेंटर और विनिर्माण क्षेत्र से जुड़ी कई बड़ी परियोजनाओं की घोषणाएं हो चुकी हैं। इनमें से कुछ परियोजनाएं स्वीकृतियों और प्रक्रियागत अड़चनों के कारण आगे नहीं बढ़ पाई हैं, जबकि 219 परियोजनाओं पर काम शुरू हो चुका है और वे विभिन्न चरणों में क्रियान्वित की जा रही हैं।
उद्योग विभाग का मानना है कि निष्क्रिय पड़े भूखंडों को वापस लेकर नए निवेशकों को उपलब्ध कराने से औद्योगिक गतिविधियों को गति मिलेगी, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और राज्य में निवेश का वातावरण अधिक मजबूत बनेगा। सरकार का संदेश साफ है कि औद्योगिक विकास के लिए आवंटित जमीन अब वर्षों तक खाली नहीं छोड़ी जा सकेगी, बल्कि उसका उपयोग उत्पादन और निवेश बढ़ाने के उद्देश्य से ही किया जाएगा।