फीता कटने से पहले फटी एनएच की सड़क ! आई पंजे के निशाने पर

रायपुर। सरकारें विकास का खाका तैयार करने में कोई कोताही नहीं करतीं लेकिन ब्यूरोक्रेट्स इसे धरातल स्तर पर उतार नहीं पाते। अगर वे मूर्तरूप ले भी लें तो उस पर सवालिया निशान लगना तय है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है कि अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच सांठगांठ। हर काम बिना कमीशनखोरी की चासनी से पूरा नहीं होता है। लगता है कि अब ये एक परंपरागत व्यवस्था बन गई हैं। कुछ ऐसा ही उदाहरण इस वक्त सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। जिसे छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने अपने सोशल मीडिया के प्लेटफार्म पर एनएचआईए द्वारा बनाए गए रायपुर-विशाखापट्‌टनम राष्ट्रीय राजमार्ग की विडियो पोस्ट की है। जिसमें उदघाटन से पूर्व ही सड़क में बीचो बीच दरारें नजर आ रही हैं।
इसे लेकर कांग्रेस ने अपने एक्स हैंडल पर विडियो पोस्ट करते हुए लिखा है कि, “विकास” का ऐसा नमूना शायद पहली बार देखा होगा…। NHAI द्वारा बनाए गए रायपुर–विशाखापट्टनम राष्ट्रीय राजमार्ग की ये तस्वीरें बहुत कुछ बयां कर रही हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग की सड़क उद्घाटन से पहले ही जवाब दे गई। फ़ीता कटने से पहले फट गई सड़क… गजब विकास!
बहरहाल, कांग्रेस के उक्त पोस्ट के बाद यह एक मुद्दा भी बनता जा रहा है। बताया जा रहा है कि, कांग्रेस की इस टिप्पणी के बाद आनन-फानन सड़क के बीच दरारों को भरने का काम भी कर दिया गया होगा। वैसे इस सड़क को उद्योग और व्यापार के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस कारिडोर के जरिए विकास के बड़े-बड़े दावे भी किए गए हैं।

दरारों पर सीमेंट का सहारा, मरम्मत को लेकर उठे सवाल

हैरानी की बात यह है कि जिस सड़क की हालत खराब मिली, उसी हिस्से में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के प्रस्तावित ‘ड्राइव टेस्ट’ की तैयारियां चल रही थीं। जांच में सामने आया कि कांकेर जिले में बासनवाही और मावलीपारा के बीच नेशनल हाईवे का एक बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो चुका है।
सड़क पर आई दरारों और खराब स्थिति की जानकारी सामने आने के बाद नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने तुरंत मरम्मत का काम शुरू कर दिया। फिलहाल दरारों को सीमेंट से भरकर अस्थायी सुधार किया जा रहा है।
इस सड़क का निर्माण भोपाल की कंपनी दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड (DBL) ने किया था। अनुबंध के अनुसार, निर्माण एजेंसी को अगले 15 वर्षों तक सड़क के रखरखाव और किसी भी तरह की खराबी की मरम्मत की जिम्मेदारी निभानी है। सड़क की मौजूदा स्थिति ने निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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